देवबंद (सहारनपुर)। राम मंदिर विवाद के हल का फार्मूला तलाश रहे आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर से दारुल उलूम ने किसी भी तरह की बातचीत करने से इंकार कर दिया है। इस संबंध में पीएमओ ने दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से संपर्क किया था। मोहतमिम ने कहा कि वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं।
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अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए श्रीश्री रविशंकर मुस्लिम और हिंदू नेताओं से मिलकर बातचीत का रास्ता निकालने के लिए सक्रिय हैं। इसी कड़ी में वह मुसलमानों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था दारुल उलूम की ओर भी रुख करने का मन बनाए हुए थे। दारुल उलूम प्रबंधतंत्र का इस मुद्दे पर क्या रुख है इसके लिए बृहस्पतिवार को पीएमओ ने मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से फोन पर संपर्क किया, लेकिन मोहतमिम ने इस मुद्दे पर श्रीश्री रविशंकर से किसी भी प्रकार की बातचीत करने से इंकार कर दिया। मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम बनारसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पीएमओ से उनके पास फोन आया था और वह जानता चाहते थे कि वह श्रीश्री रविशंकर की इस मुहिम से सहमति रखते हैं या नहीं। जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि दारुल उलूम का बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर वही रुख होगा जो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का है। इसलिए दारुल उलूम इस मुद्दे पर अलग से किसी भी प्रकार की कोई बातचीत नहीं करना चाहता। मोहतमिम ने यह भी कहा कि बातचीत करने से गलत फहमियां बढ़ जाती हैं और वह यह नहीं चाहते।
लॉ बोर्ड के साथ ही दारुल उलूम
दरअसल, दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षण संस्थान है। यही कारण है कि दारुल उलूम राजनीतिक और ऐसे विवादित मामलों में नहीं पड़ता है। तीन तलाक जैसे मसले पर भी दारुल उलूम ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ ही आंदोलन चलाया था। ऐसे में अयोध्या मसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख से ही दारुल उलूम के रुख का पता लगेगा।
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