यूपी के मेरठ में कंकरखेड़ा बाईपास स्थित होटल ब्लैक पेपर में शुक्रवार रात हुए बखेड़े के बाद जहां आरोपी होटल मालिक और भाजपा पार्षद मनीष पंवार को कोर्ट ने जेल भेज दिया। वहीं लाइन हाजिर किए गये दरोगा सुखपाल सिंह पंवार बेटे की बीमारी के चलते अपने घर सहारनपुर चले गये हैं।
वहीं अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में दरोगा ने बताया कि शुक्रवार को दशहरा मेले में मेरी ड्यूटी लगी थी। दिनभर खाना नहीं खाया, शाम को सात बजे गांव में पुतला दहन के बाद थाने पहुंचा तो इंस्पेक्टर ने कहा कि महिला अधिवक्ता के केस में मुल्जिमों की गिरफ्तारी होनी है। जिसके बाद अपनी कार से बाईपास पर होटल ब्लैक पेपर पहुंचा, जहां केस की वादी महिला अधिवक्ता भी आ गई। खाना मैंने मंगाया था और वेटर से कॉफी को लेकर महिला की कहासुनी हो गई। होटल मालिक मनीष चौधरी आया तो वह गाली गलौज करने लगा। मैंने समझाने की कोशिश की तो और ज्यादा गाली दी और हाथापाई की। मैंने फिर भी यहा कहा कि आपके पिता मुझे जानते हैं। मैंने भी इंस्पेक्टर को सूचना दे दी थी। मनीष ने महिला का मोबाइल छीनकर गेट बंद कर लिए। मैंने वीडियो बनाने की कोशिश की तो मोबाइल छीन लिया।
नशे की हालत में नहीं था-
सुखपाल पंवार ने कहा कि मुझे बार बार यही कहा कि शराब पी रखी है, लेकिन मैंने शराब का सेवन नहीं किया था। जबरन मेरी पिस्टल निकालने की कोशिश की तो मैं भिड़ गया। पिस्टल बाहर आयी तो महिला भी बचाने लगी। मैंने पिस्टल कवर के अंदर रखी। उसके बाद भी होटल मालिक ने मुझे कई थप्पड़ जड़े तो दूसरे कर्मचारी ने मुझे खींचकर गिरा दिया। छीनाझपटी में गोली चल जाती तो मुझे जेल जाना पड़ता।
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