सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना ने बताया कि सुदेश देवी के पास 14 जनवरी को एक व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा तुम्हारा बेटा ड्रग्स तस्करी के केस में पकड़ा गया है। अगर उसे जेल जाने से बचाना है तो तुरंत 30 लाख रुपये खाते में डलवाओ वरना सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। ठगों ने सुदेश देवी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और उन्हें किसी से बात करने या घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी। 15 जनवरी को मकर संक्रांति की छुट्टी होने के कारण बैंक बंद थे। दहशत में जी रही मां शुक्रवार को बैंक पहुंचीं और आरटीजीएस के जरिए 30 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में भेज दिए।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट में ठग पुलिस, सीबीआई , ईडी या नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। ठग वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में या थाने जैसे दिखने वाले सेटअप में बैठते हैं। डराते हैं कि उनका या उनके बच्चे का नाम गंभीर अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या मानव तस्करी में आया है। वे पीड़ित को आदेश देते हैं कि जब तक जांच चल रही है वे कैमरा बंद नहीं कर सकते, किसी से बात नहीं कर सकते और घर से बाहर नहीं जा सकते।
सावधानियां और बचाव के तरीके
-कोई भी असली जांच एजेंसी (पुलिस/सीबीआई) कभी भी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून है।
-अगर अधिकारी बनकर पैसों की मांग करे या पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो समझ जाएं कि यह फ्रॉड है।
-अगर ठग कहें कि आपका बेटा/बेटी या परिजन मुसीबत में हैं तो घबराने के बजाय फोन काटें और सीधे बच्चे या उनके दोस्तों को कॉल करें।
-अनजान कॉलर को अपना आधार नंबर, बैंक डिटेल्स या ओटीपी बिल्कुल न दें।
-ऐसी घटना हो तो 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।