आरोपी ने कुछ निजी जानकारी लेने के बाद कॉल कथित एसआई अनुराग चहल को ट्रांसफर कर दी। अनुराग चहल लगातार उन्हें कॉल और मेसेज करता रहा। उसने कथित रघुनाथ पांडे को अपना सीनियर बताते हुए वीडियो कॉल पर बात कराई। रघुनाथ पांडे ने कहा कि आपका नाम नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। हम जांच कर रहे हैं।
आपको सारा बैंक बैलेंस और एफडी आदि रकम हमें ट्रांसफर करनी होगी। जांच के बाद सारी रकम आपके खाते में वापस भेज दी जाएगी। आपकी एफडी समय से पहले टूटेगी तो उसका हर्जाना आरबीआई भरेगा। करीब 3:35 मिनट तक वह लगातार वीडियो कॉल पर बात करता रहा।
ऐसे शिकार बनाते हैं साइबर ठग
साइबर ठग अब पढ़े लिखे लोगों को भी अपने भावनात्मक और फर्जी आधिकारिक जाल में फंसाकर उनकी पसीने की गाढ़ी कमाई को एक झटके में लूट रहे हैं। इस पूरी लूट का चिंताजनक पक्ष यह है कि डिजिटल अरेस्ट का शिकार ज्यादातर वो लोग हो रहे हैं, जो बुजुर्ग हैं और आमतौर पर कानून और व्यवस्था का सम्मान करने वाले हैं। ये अभी भी मानते हैं कि नियम कायदे, सरकारी दस्तावेज और आधिकारिक संस्थाएं फर्जी नहीं हो सकतीं। दुर्भाग्य से इसी सकारात्मक सोच का नाजायज फायदा साइबर अपराधी धड़ल्ले से उठा रहे हैं।
अपराधी अपनाते हैं ये तरीका
डिजिटल अरेस्ट करने के लिए आपको अचानक ही एक फोन कॉल आएगा। जिसमें कॉलर बताएगा कि आपने अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित पार्सल भेजा था या आपको यह मिला है यानी आपने इसे रिसीव किया है। कई बार आपको टारगेट करने के लिए यह फोन कॉल आपके रिश्तेदारों या दोस्तों को भी जा सकती है, जिन्हें बताया जाएगा कि आपके दोस्त या आपके रिश्तेदार ऐसे अपराध में शामिल हैं। आपको जैसे ही दोस्त या रिश्तेदार से यह सूचना मिलेगी, आप घबरा जायेंगे।
एक बार टारगेट सेट करने के बाद अपराधी आपको स्काइप या किसी अन्य वीडियो कॉलिंग सिस्टम से आपसे संपर्क करेंगे। वो खुद को कानूनी अधिकारी, पुलिस या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश करेंगे। सरकारी वर्दी में भी दिखेंगे। वीडियो कॉल में आप उन्हें किसी फर्जी पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय में बैठे दिखेंगे ताकि आपको विश्वास हो जाए। आपसे वो "समझौता" करने या "मामले को बंद करने" के लिए पैसे मांगेंगे, लेकिन पैसे तभी मांगे जाएंगे, जब आप मजबूर हो चुके होंगे।
ये बरतें सावधानी
-सीबीआई या क्राइम ब्रांच से कॉल आने पर तुरंत यूपी-112 या संबंधित थाने में फोन कर कंफर्म करें।
-पुलिस या सीबीआई किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। ऐसी कॉल आने पर परिजनों और दोस्तों से तुरंत बात करें।
-कोई पार्सल आने, उसमें ड्रग्स मिलने, मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ दिखाने, व्हाट्सएप पर वॉरंट भेजने वाले जालसाज हैं। इनसे डरे नहीं।
-कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर गूगल से सर्च न करें। कंपनी की वेबसाइट से ही लें।
-अनजान शख्स की ओर से भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और कोई एप डाउनलोड न करें।