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मनोनीत पार्षदों की सदस्यता पर संकट के बादल

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मनोनीत पार्षदों की सदस्यता पर संकट के बादल
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मेरठ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मनोनीत किए गए नगर निगम के पार्षदों की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। निगम एक्ट के मुताबिक निर्धारित समय में मनोनीत सदस्यों को शपथ नहीं दिलाने से उनका नोटिफिकेशन दोबारा से जारी करना होगा।
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प्रदेश सरकार ने तीन मार्च को नगर निगम में टीसी मनोठिया, वीरसिंह सैनी, राजकुमार मांगलिक, हेमा पंत, सौरभ गौड़, लेखराज सिंह, धनंजय कालिया, ओमकुमार त्यागी, सतनाम नामी, राकेश जैन को पार्षद मनोनीत किया था। लेकिन अभी तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई है। नगर निगम एक्ट की धारा 85 के अनुसार सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों को तीन माह के अंदर शपथ ग्रहण कराया जाना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं होने की दशा में सरकार को दोबारा से मनोनीत सदस्यों के नामों की सूची जारी करनी होती है। ऐसी स्थिति में पार्षदों की सदस्यता खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भाजपा के सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर सरकार ने मनोनीत पार्षदों की सूची जारी की तो कई लोगों के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि सरकार ने ऐसे वार्डों में पार्षद मनोनीत किए हैं जहां पर पहले से ही भाजपा के पार्षद हैं। आने वाले समय में मनोनीत पार्षदों की क्या स्थिति रहेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन फिलहाल मनोनीत पार्षदों को शपथ नहीं दिलाए जाने का मामला चर्चाओं में आ गया है। मनोनीत पार्षद वीर सिंह सैनी का कहना है कि हम पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। सरकार ने मनोनीत करके निगम में भेजा है। अभी तक शपथ नहीं दिलाए जाने के लिए नगर आयुक्त और महापौर जिम्मेदार हैं। उधर महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि निगम प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई ऐसा पत्र नहीं लिखा गया है जिसमें मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाई जाने की बात कही गई हो। अगर ऐसा कोई पत्र आता है तो उस पर संज्ञान लिया जाएगा।
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