सांडू को कस्टडी से छुड़ाने के दौरान पुलिस की एक गोली बाफर के साथी शुभम को लगी थी। जिसका इलाज कंकरखेड़ा के नटेशपुरम निवासी डॉ. रजत भाटी ने किया था। सांडू़ तीन दिन मेरठ में रुककर दो साथियों के साथ भाग गया था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने शनिवार देर रात सरूरपुर और सरधना के कई गांवों में दबिश दी, लेकिन सांडू हत्थे नहीं चढ़ा।
डॉ. भाटी पकड़ा, मेरठ पुलिस लगी
बाफर के देहात में कई ठिकाने हैं। मुजफ्फरनगर से इनपुट मिलने के बाद मेरठ पुलिस भी सांडू़ को ढूंढने में लग गई। दोनों जिलों की पुलिस ने डॉ. भाटी को कंकरखेड़ा से ही गिरफ्तार कर लिया।
दरोगा का हत्यारोपी है सांडू
आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के सामने चुनौती बनी है। पुलिस कस्टडी से छुड़ाने के दौरान बदमाशों ने मिर्जापुर पुलिस पर गोलियां चलाई थी। जिसमें एक दरोगा को गोली लगी थी। इलाज के दौरान तीन दिन पहले दरोगा की मौत हो गई। जिसके बाद एसटीएफ भी सांडू की गिरफ्तारी के लिए लगी है।
गांव में रहा, चुनाव भी हारा
भूपेंद्र जानी क्षेत्र के बाफर गांव है। साल 2017 में जेल से छूटने के बाद बाफर ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा। लेकिन हार गया। फिलहाल बाफर साइलेंट था। सुशील मूंछ की हत्या कराने के लिए पुलिस कस्टडी से रोहित उर्फ सांडू की फरारी में बाफर की भूूमिका बताई है। जिसके चलते पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
बाफर का अपराधिक इतिहास
1985 में हैदराबाद में दिनदहाड़े बैंक लूटा।
1987 में आंध्रप्रदेश में बैंक लूटा।
1991 में मुजफ्फरनगर में हत्या की।
1992 में देहरादून में हत्या की।
2007 में लिसाड़ीगेट में जानलेवा हमला किया।
2007 में सदर बाजार में हत्या की ।
2012 में लालकुर्ती मेें हत्या की।