ग्रामीणों से जानकारी लेती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
जब शमून की हत्या हुई, तो उसकी पत्नी राशिदा का रो रोकर बुरा हाल हो गया। वह कहती रही कि हम तो गांव छोड़कर चले गए थे। पहले तो वह कह रहे थे कि शमून से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन धोखे से बुलाकर मेरे पति की हत्या कर दी। वहीं, हत्यारोपियों ने शमून को गोलियां मारने के बाद चाकू से तब तक प्रहार किए, जब तक उसकी सांसे रुक नहीं गईं। हत्यारोपियों के सिर खून सवार था। वह घटनास्थल से तभी फरार हुए, जब पूरा विश्वास हो गया कि अब शमून की मौत हो चुकी है।
मामूली विवाद की रंजिश में चली गई दो जानें
गांव खंद्रावली निवासी मुनव्वर की हत्या गत दिसंबर माह में हुई। उसकी हत्या की वजह कोई बड़ी नहीं थी। उस वारदात से तीन महीना पूर्व गांव के ही लाल्ला से बाइक टकराने को लेकर मुनव्वर का विवाद हुआ था। उसी विवाद को लेकर कई बार मारपीट तक हुई थी। बाद में जब मुनव्वर की हत्या हुई, तो उसमें लाल्ला सहित चार युवकों को आरोपी बनाया गया। अब लाल्ला के भाई शमून की हत्या कर दी गई।
हत्यारोपियों के घर पर लटके ताले
शमून की हत्या के बाद दूसरे पक्ष के लोगों के घरों पर ताले लटक गए। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मकानों पर दबिश दी, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। हत्याकांड में छह लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें सभी आरोपी अपने घरों को बंद करके फरार हो गए हैं।
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