हापुड़ रोड पर पशुओं से लदे एक खराब ट्रक में शुक्रवार तड़के बाइक से लदा कंटेनर घुस गया। हादसे में खराब ट्रक के पीछे खडे़ तीन लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि, तीसरे ने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, पुलिस ने आरोपी कंटेनर चालक को हिरासत में ले लिया। रोड पर खडे़ कंटेनर को हटाकर यातायात शुरू कराया। मृतकों के परिजनों ने आरोपी कंटेनर चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कानपुर देहात के थाना डेरापुर क्षेत्र के गांव नूनारी निवासी नरेंद्र पुत्र पदम सिंह जूनियर स्कूल में शिक्षक था। उसने गांव में ही मिनी कामधेनु डेयरी खोली थी। तीन दिन पहले वह गांव के ही विपिन पुत्र कृपा नारायण, राघवेंद्र पुत्र लालसिंह, पड़ोसी गांव बिसौड़ा के जयचंद पुत्र रामआहार के साथ डेयरी के लिए भैंस खरीदने हरियाणा गया था। नरेंद्र ने करनाल और मुजफ्फरनगर से पांच-पांच भैंसें खरीदीं। वे बृहस्पतिवार शाम भैंस लादकर अपने गांव के लिए चले थे।
शुक्रवार तड़के करीब चार बजेे वे हापुड़ रोड स्थित गांव पांची भट्ठे के निकट पहुंचे। इसी दौरान ट्रक की फैन बेल्ट खराब हो गई। चालक ट्रक को सड़क पर ही खड़ा करके उसे ठीक करने लगा। वहीं, नरेंद्र, विपिन और जयचंद भी नीचे उतर गए। वे ट्रक के पीछे जाकर भैसों को देखने लगे। इसी दौरान हरिद्वार से अलीगढ़ जा रहे बाइकों से लदे कंटेनर ने टक्कर मार दी। इसमें नरेंद्र (45) और जयचंद (46) की मौत हो गई और विपिन गंभीर (47) रूप से घायल हो गया। राघवेंद्र और ट्रक चालक ने भाग रहे आरोपी कंटेनर चालक को दबोच लिया।
इसके बाद राघवेंद्र ने पुलिस कट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस ने वहां पहुंचकर घायल विपिन को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और कंटेनर को रोड से हटाकर यातायात सुचारु कराया। वहीं, राघवेंद्र ने घटना की जानकारी परिजनों को दी। मृतक जयचंद के बेटे जयवीर की ओर से आरोपी अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। उधर, विपिन ने भी दोपहर में दम तोड़ दिया।
नरेंद्र ने ज्वाइन नहीं किया स्कूल
नरेंद्र के तीन बेटे हैं। कुछ समय पहले ही वह जूनियर हाईस्कूल में प्रोन्नत हुआ था। उसने अभी स्कूल ज्वाइन नहीं किया था। वहीं, जयचंद गांव में खेती करता था।
राघवेंद्र के नहीं थम रहे आंसू
नरेंद्र का चौथा साथी राघवेंद्र हादसे के वक्त ट्रक के ऊपर सोया था। अचानक तेज आवाज होने पर उसकी नींद खुली और आनन-फानन में गाड़ी से नीचे कूदा। वहां नरेंद्र और जयचंद मृत पडे़ थे। उन्हें देख वह सन्न रह गया। उसे कुछ भी समझ नहीं आया। राघवेंद्र के उसी समय से आंसू थम नहीं रहे हैं।