12 घंटे बाद कैसे बिगड़ी छात्रा की हालत
पुलिस के मुताबिक, सूरज का कहना है कि उसने छात्रा को बुधवार शाम सात बजे सल्फास दिया, जबकि छात्रा की हालत गुरुवार सुबह 7:00 बजे बिगड़ी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सल्फास ने 12 घंटे बाद कैसे असर दिखाया। हालांकि इस पर भी पुलिस ने तर्क दिया है कि आरोपी ने बताया है कि सल्फास खाने के बाद छात्रा को उल्टी हुई थी। इसके चलते जहर का असर 12 घंटे बाद हुआ होगा।
यह था मामला
शास्त्री नगर की छात्रा बुधवार को परीक्षा देने के लिए बेगम पुल के पास एक नामचीन स्कूल में गई थी। बुधवार रात 8:30 बजे छात्रा बदहवास हालत में ई-रिक्शा से घर पहुंची। परिजनों ने जानलेवा हमले का प्रयास होने की बात कहकर नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। गुरुवार को छात्रा की हालत बिगड़ गई तो उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार के लोगों ने कार्रवाई के लिए काफी हंगामा भी किया था।
जिस पर भरोसा किया, उसी ने मार डाला
जिस दोस्त पर छात्रा को पूरा भरोसा था, उसी ने उसे मार डाला। उसे जरा भी यकीन नहीं था कि सूरज उसके साथ ऐसा भी कर सकता है। दोनों ने एक साथ रहने की कसम खाई थी, लेकिन सूरज ने कसम तोड़ दी और उसकी ही जान का दुश्मन बन गया। छात्रा नाबालिग बताई गई है। उसकी उम्र 17 साल थी। इसके बावाजूद भी गेस्ट हाउस में कमरा मिल गया, कोई आईडी तक नहीं ली। छात्रा की हालत बिगड़ी तो संचालक ने अपने स्कूटी से उनको तेजगढ़ी चौराहे तक भी छोड़ दिया। किराए के पैसे भी नहीं लिए। वह सूरज को पहले से जानता था। करीब तीन घंटे वह गेस्ट हाउस में रुके। पुलिस सूरज को दो दिन से तलाश भी कर रही थी, बावजूद गेस्ट हाउस वाले ने कोई बात पुलिस को बताने की जहमत नहीं उठाई।
पता चला है कि सूरज के कई लड़कियों से संबंध हैं। यह बात परिवार के लोगों को भी पता थी। छात्रा की सहपाठी आरोपी सूरज के परिवार के एक लड़की है, जिसने दोनों की दोस्ती कराई थी। उसने भी छात्रा को सूरज के बारे में नहीं बताया। अब पुलिस हर पहलुओं पर जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि छात्रा की हत्या के मामले में जो आरोपी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इस घटना में छात्रा के परिजनों को धमकी देने वाले आरोपी के चाचा को भी पुलिस ने नहीं पकड़ा है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सूरज करता था छात्रा के परिजनें से बात
सूरज शातिर है और वह नाम गलत बताकर बार-बार छात्रा के परिजनों से बात करता रहा। कभी चाचा बनकर तो कभी ई-रिक्शा चालक बनकर छात्रा के पिता को कॉल करके बात करता था। तलाशी के दौरान उसके पास से 10 सिम मिले है। इसके अलावा वह किसी को भी फोन मांगता था और कॉल कर देता था। छात्रा को जहर खिलाने के बाद भी सूरज ने उसके परिजनों को दस कॉल अलग-अलग नंबर से करना स्वीकार किया।