ललिता जानी क्षेत्र स्थित रेडीमेंट गारमेंट फैक्टरी में नौकरी करने लगी। वहां मजदूर ठेकेदार बहसूमा क्षेत्र के बटावली निवासी मोहकम से उसका प्रेम-प्रसंग चलने लगा तो ललिता ने गौरव से दूरी बनानी शुरू कर दी। गौरव ने इसका विरोध किया तो ललिता ने मोहकम को इस बारे में बताया। मोहकम ने मीरापुर कस्बे के कोटला निवासी दोस्त भानु के साथ मिलकर गौरव की हत्या की साजिश रची। 18 फरवरी को वह गौरव को मोड़कलां गांव के जंगल ले गए और गौरव की हत्या करने के बाद पहचान मिटाने के मकसद से शव जला दिया।
यह था मामला
मोड़कलां के जंगल में प्रधान कृष्णपाल के खेत में 19 फरवरी को जला हुआ शव मिला था। शव की शिनाख्त नहीं होने पर 72 घंटे बाद पुलिस ने शव का अज्ञात में अंतिम संस्कार किया था। वहीं डाहर निवासी ललिता भी 19 फरवरी को फरार हो गई थी।
परिजनों ने गौरव पर उसे बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दूसरी ओर गौरव के परिजनों ने सरूरपुर थाने में उसके लापता होने की तहरीर दी थी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। अब छानबीन के बाद जानी पुलिस ने ललिता को बरामद कर पूछताछ की तो उसने गौरव की हत्या का राज खोल दिया। इसके बाद जानी पुलिस ललिता को लेकर बहसूमा थाने पहुंची। बहसूमा पुलिस ने मोहकम और उसके दोस्त भानु को गिरफ्तार कर लिया। दोनों गौरव की हत्या करने के बाद शव को ईंख की पत्ती से जलाकर फरार होने की बात स्वीकार की।
भानु ने पैर पकड़े, मोहकम ने कैंची गर्दन में घोंपी
पुलिस के अनुसार, ललिता से कोर्ट मैरिज कराने के बहाने गौरव को मोहकम और भानु ने बुलाया था। कंकरखेड़ा क्षेत्र में पहले तीनों ने शराब पी और फिर उसे मोड़कलां के जंगल में ले गए। वहां भानु ने गौरव के पैर पकड़े और मोहकम ने गर्दन में कैंची घोंपकर उसकी हत्या कर दी। बहसूमा थाने पहुंचे गौरव के छोटे भाई सौरभ ने बताया कि उसका भाई ठीक से बोल नहीं पाता था। 18 फरवरी सुबह 10 बजे वह लापता हो गया। वह घर पर गणेशपुर शादी में जाने की बात भी कह रहा था। पुलिस पूछताछ में आरोपी मोहकम ने बताया कि उससे मिलने के बाद ललिता ने गौरव से बात करनी बंद कर दी थी, जिसके चलते वह ललिता को परेशान करने लगा था। इसी वजह से उसे रास्ते से हटा दिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त कैंची, बाइक, गौरव का मोबाइल और गमछा भी बरामद किया।
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