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याकूब पर कार्रवाई से कांप रहे पुलिस के हाथ

Thu, 19 Nov 2015 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी के मीट प्लांट में चोरी के पशु काटने का खुला खेल चल रहा है। पुलिस फैक्ट्री से दो भैंसों के अवशेष बरामद कर चुकी है, जो चोरी कर यहां काटे गए। सीसीटीवी कैमरे में सारी करतूत कैद भी हुई। लेकिन पुलिस हाजी याकूब के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
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सुबूत होने के बावजूद भी पुलिस जांच का बहाना कर रही है।
सवाल यह भी है कि क्या संभव है कि किसी फैक्ट्री में चोरी के पशु काट दिए जाएं और फैक्ट्री मालिक की जानकारी में न हो। क्या इतने बड़े खेल से फैक्ट्री मालिक अनजान है। लेकिन पुलिस फिलहाल कुछ भी करने को तैयार नहीं है। पुलिस का कहना है कि कोई भी छोटा व्यापारी डायरेक्ट फैक्ट्री में पशु लेकर नहीं जा सकता। फैक्ट्री के गेट पर ठेकेदार मौजूद होते हैं और वे गेट पर ही चोरी के पशु को औने-पौने दामों में खरीद लेते हैं और फिर उसे प्लांट के अंदर लाया जाता है।

गाड़ी की एंट्री में खेल
गाड़ी के नंबर की पहचान न हो, इसके लिए फैक्ट्री के अंदर लाई जाने वाली गाड़ी के पीछे ए/एफ (एप्लाइड-फॉर) लिखा होता है। चोरी के पशु लेकर आने वाली गाड़ी पर भी नंबर मौजूद था लेकिन फुटेज तथा रजिस्टर में उसकी एंट्री बिना नंबर की मिली।
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एसओ बोले याकूब का क्या दोष
फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई करने के सवाल पर एसओ खरखौदा पीयूष दीक्षित का कहना है कि फैक्ट्री मालिक ने पशु खरीदने का ठेका अन्य ठेकेदारों को दिया है। ऐसे में ठेकेदार कहां से पशु खरीदते हैं, यह फैक्ट्री मालिक की जिम्मेदारी नहीं है। प्रकरण में क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी से बात की जाएगी और नियम का पता लगाया जाएगा। जांच करेंगे कि चोरी के पशु फैक्ट्री के अंदर आने की जानकारी फैक्ट्री मालिक को थी या नहीं। वहीं, क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी फफूंडा डॉ. संजय चतुर्वेदी का कहना है कि फैक्ट्री में पशु कहां से लाए जा रहे हैं, यह देखना मेरी जिम्मेदारी नहीं।
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