मोदीनगर मुठभेड़ में श्रेय लेने को लेकर मेरठ और गाजियाबाद पुलिस के बीच हुए बखेड़े का एक अहम कारण मंगलवार को सामने आया है। डीआईजी रेंज का कहना है कि मुठभेड़ के दौरान जिस बदमाश को मोदीनगर के सिपाही ने दबोचा था, उसे मेरठ के दरोगा ने श्रेय लेने के लिए उससे जबरन छीन लिया था। जबकि इसी बदमाश ने सिपाही अनिल को गोली मारी थी। मेरठ पुलिस की यह हरकत गाजियाबाद पुलिस को नागवार गुजरी थी। इसकी शिकायत डीजीपी और प्रमुख सचिव से तो की ही गई, प्रेस वार्ता में भी गाजियाबाद पुलिस ने इसी नाराजगी में मेरठ पुलिस को नकार दिया था।
मोदीनगर मुठभेड़ को छह दिन बीत चुके हैं। लेकिन अपनी बहादुरी साबित करने में दोनों जिलों के बीच जुबानी जंग जारी है। मेरठ पुलिस का आरोप है कि खरखौदा में पशु व्यापारियों से लूटे 25.50 लाख रुपये बरामद करने और तीन बदमाश पकड़ने का श्रेय गाजियाबाद पुलिस अकेले लेना चाहती है। जिस पर मेरठ पुलिस को एतराज है। यह मुठभेड़ गाजियाबाद और मेरठ पुलिस का ज्वाइंट टास्क था। जिसमें प्रमाण उनके पास भी हैं। लेकिन गाजियाबाद पुलिस मुठभेड़ स्थल पर मेरठ पुलिस के अफसरों के खींचे गए फोटो को नकार चुकी है। दोनों जिलों के बीच इस विवाद को विराम देने के लिए खुद डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार सोमवार को इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि यह मेरठ पुलिस का महज फोटो शूट सेशन था। मुठभेड़ का श्रेय गाजियाबाद पुलिस को जाता है।
मेरठ पुलिस का दावा
मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों को गाजियाबाद पुलिस ने पकड़ा था। हम भी वहां सक्रिय रूप से मौजूद थे, इसलिए तीसरे बदमाश विकास को हमने खुद दबोचा था।
गाजियाबाद पुलिस का तर्क
बदमाश विकास को मोदीनगर कोतवाली के सिपाही ने मुठभेड़ के बाद पकड़ा था। वह उसे खेत से खींचकर जब बाहर लाया तो बाहर मौजूद मोहिउद्दीनपुर पुलिस चौकी (मेरठ) पर तैनात दरोगा महेंद्र सिंह ने जबरन बदमाश को सिपाही से छीन लिया था। दरोगा उस बदमाश को पकड़कर वहां मौजूद अपने जिले के अफसरों के पास ले गया था। यह दिखाने के लिए कि मेरठ पुलिस ने ही यह बदमाश दबोचा है।
शासन से हो गई शिकायत
जबरन बदमाश को छीनकर ले जाने की बात सिपाही ने अपने एसएसपी धर्मेंद्र यादव से बताई तो उन्होंने इसकी शिकायत डीजीपी और प्रमुख सचिव से की। यही नहीं, मेरठ पुलिस की मुठभेड़ में क्या भूमिका थी, यह भी बारीकी से बताया।
विकास ने मारी थी गोली
सिपाही अनिल को गोली बदमाश विकास ने मारी थी। यह बात विकास से पूछताछ में पता चली तो गाजियाबाद पुलिस और भी नाराज हो गई। इस बात को लेकर गाजियाबाद और मेरठ पुलिस में तीखी झड़प भी हुई। उसके बाद एसएसपी गाजियाबाद ने निवाड़ी थाने में प्रेसवार्ता के दौरान मेरठ पुलिस का नाम मुठभेड़ से ही गायब कर दिया।