पाकिस्तान में चल रही दहशतगर्दी की ट्रेनिंग की एक और हकीकत सामने आ गई। पाक जासूस इजाज ने रिमांड में हुई पूछताछ में खुलासा किया कि उसे इस्लामाबाद में आईएसआई की पाठशाला में नौ महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। कैंप में उसे भारतीय सेना के संबंध में बारीकी से बताया गया। फिर विशेष मिशन के तहत भारत भेजा गया।
इजाज को बुधवार सुबह पुलिस रिमांड पर लेते ही पूछताछ की शुरूआत पाकिस्तान से की गई। जानने की कोशिश की गई कि वह किस तरह से आईएसआई के संपर्क में आया और फिर उसे कैसे ट्रेनिंग दी गई। इस्लामाबाद में किस तरह से और कितने लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है।
पैसों का लालच देकर फंसाया
इजाज ने खुलासा किया कि उसे आईएसआई के एजेंट सुब्हानी ने पैसों का लालच देकर उसे फंसाया था। सुब्हानी ने ही इजाज की मुलाकात आईएसआई के एसपी सलीम से कराई थी। सलीम ने उसे और उसके परिवार को मोटी रकम देने के साथ ही सुविधाएं मुहैय्या कराने की बात की थी। जिस पर वह भारत में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने को तैयार हो गया था। जिसके बाद उसकी ट्रेनिंग इस्लामाबाद में शुरू हो गई।
तीन से चार दिन कई घंटे ट्रेनिंग
इजाज ने बताया कि वह सप्ताह में तीन से चार दिन ट्रेनिंग के लिए जाता था। इस दौरान उसे पांच से छह घंटे तक कड़ी ट्रेनिंग दी जाती थी।
युवा हैं निशाने पर
बकौल इजाज, ट्रेनिंग कैंप में उस जैसे कई और युवा थे। जिन्हें कैंप में ट्रेनिंग दी जाती है। किसी को खुफिया जानकारी जुटाने की बारीकियां बताई जाती हैं तो किसी को आर्म्स ट्रेनिंग दी जाती है। ताकि उसके जरिए भारत में आतंकी हमलों को वक्त आने पर अंजाम दिया जा सके। ट्रेनिंग पूरी होने पर एजेंट को अलग-अलग टास्क के साथ भारत में भेजा जाता है। फिर समय-समय पर मिलने वाले संकेत के आधार पर वे काम करते हैं।
सैन्य गतिविधियों की ट्रेनिंग
ट्रेनिंग कैंप में इजाज को विशेष तौर पर आर्मी फॉर्मेशन से जुड़े तथ्यों को नौ महीने की ट्रेनिंग में बारीकी से बताया गया। उसे ट्रेनिंग दी गई कि सैन्य फॉर्मेशन में ब्रिगेड, यूनिट, कमांड में क्या फर्क है और इसकी महत्ता क्या है। साथ ही ऑपरेशनल विंग कौन सी होती है। आर्मी ऑफिसर के रैंक और स्टार के बारे में बताया गया। उसे आर्मी यूनिट के अफसरों के पदों के बारे में जानकारी दी गई। बताया कि वह अफसर का बैच देखकर उसके पद को समझ ले।
टेक नंबर और आर्मी मूवमेंट
ट्रेनिंग के दौरान उसे बताया गया कि वह आर्मी की गाड़ियों पर पडेे़ टेक नंबर (सैन्य गाड़ियों पर लिखे जाने वाले विशेष नंबर) को पढ़ सके और इसकी जानकारी भेज सके। उसे किस-किस सैन्य मूवमेंट की जानकारी देनी है। इसके लिए उसे सैन्य यूनिटों के अलावा आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाने के निर्देश थे। अखबारों में छपी सैन्य यूनिट की खबरों को भी वह भेजे, ताकि पता चल सके कि कौन सी यूनिट किस जगह पर है।
टेस्ट के बाद भेजा भारत
उसने बताया कि भारत भेजने से पहले आईएसआई एसपी सलीम ने उसका टेस्ट लिया था। जिसमें आर्मी यूनिट के संबंध में दी गई ट्रेनिंग और भाषायी ज्ञान के संबंध में सलीम ने उससे सवाल किए थे। सवालों का सही जवाब देने के बाद ही उसे भारत भेजने का निर्णय लिया गया था।