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पाक जासूस पर हल्की धाराएं, विवेचना भी लचर

Sat, 06 Feb 2016 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सेना और देश की जासूसी करने में लिप्त पाए गए पाक जासूस मोहम्मद इजाज के खिलाफ जल्द ही पुलिस चार्जशीट दे देगी। लेकिन कानून के जानकार इसे काफी गंभीर मान रहे हैं। कहते हैं कि देश को कमजोर करने वाली ऐसी ताकतों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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जिस तरह का अपराध सामने आ रहा है, उसके हिसाब से इजाज के खिलाफ काफी हल्की धाराएं लगी हैं। वैसे भी इस केस की विवेचना एनआईए को करनी चाहिए। वह जासूस के खिलाफ न केवल बेहतर सुबूत जुटा सकती है, बल्कि उससे जुड़े दूसरे जासूसों को भी खोज सकती है। क्योंकि पुलिस इतनी सक्षम नहीं है कि आईएसआई जैसे खुफिया तंत्र का चक्रव्यूह भेद सके।

वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार बख्शी और अमित दीक्षित कहते हैं कि इजाज को एसटीएफ ने पकड़ा और पुलिस को सौंप दिया। जिस तरह से इजाज ने उसने सेना और देश की अहम सूचनाएं पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेजी है। उससे साफ है कि इसकी गहराई में जाकर विवेचना होनी चाहिए।
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भले ही उपनिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी को इसकी विवेचना का अधिकार है। लेकिन यह मामला सेना और देश की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सरकार ने ऐसे मामलों के लिए नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) का गठन किया है। यह मामला काफी संवेदनशील है। जिसमें देश भर के विभिन्न हिस्सों में जाकर सुबूत जुटाने की जरूरत होती है। लेकिन पुलिस का क्षेत्राधिकार सीमित है। उसे तो जिले से बाहर जाने के लिए ही पता नहीं कितनी परमिशन लेनी होती हैं। जबकि एनआईए केंद्रीय जांच एजेंसी है। जिसके एक्सपर्ट इजाज जैसे देश के दुश्मनों का सच जानने में पूरी तरह सक्षम हैं। जबकि पुलिस का विवेचक चार्जशीट दाखिल करने के बाद चुप बैठ जाएगा।

उनका कहना है कि इजाज की जासूसी का कार्यक्षेत्र कोलकाता, बरेली, दिल्ली, गोरखपुर, लखनऊ, मेरठ और उत्तराखंड बताया गया। ऐसे में पुलिस का एक दरोगा कहां-कहां जाकर साक्ष्य ढूंढेगा। जहां तक धाराओं का सवाल है तो धोखाधड़ी या चोरी का सामान बरामद होने की धाराएं तो एक मामूली स्तर के अपराधी पर भी लगा दी जाती हैं।

जिसमें तुरंत जमानत हो जाएगी। हां बेशक इजाज पर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट लगा हो लेकिन एक अकेला एक्ट लगाकर हम उसके खिलाफ मजबूत कानूनी घेराबंदी नहीं कर सकते। किसी दूसरे देश के नागरिक द्वारा हमारी सेना और देश की जासूसी करना सीधे-सीधे देश के खिलाफ युद्ध की तैयारी की श्रेणी में आता है। इजाज के खिलाफ पुलिस को आईपीसी की धारा 121, 123, 108 ए भी लगानी चाहिए।
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