चर्चित खरखौदा कांड की पीड़िता शनिवार को न्यायालय के आदेश पर आरोपी कलीम को सौंप दी गई। महिला पुलिस की सुरक्षा में पीड़िता पहले आरोपी के गांव उलधन पहुंची, जहां कलीम नहीं मिला। उसके बाद पुलिस उसको मेरठ में कलीम के रिश्तेदार के यहां लेकर पहुंची। जहां उसे कलीम को सौंप दिया गया।
तीन अगस्त 2014 को खरखौदा थाने में धर्मांतरण और गैंगरेप का आरोप लगाकर एक किशोरी ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले को लेकर मेरठ शहर सांप्रदायिक हिंसा की आंच से झुलसने से बाल-बाल बचा। भाजपा सांसद ने इस मामले को लोकसभा में भी उठाया था। पुलिस ने किशोरी की शिकायत पर ग्राम प्रधान नवाब, सन्नाउल्ला और उसकी पत्नी समाजहां, निशात पुत्री हसमत, कलीम समेत सात लोगों को जेल भेजा था।
करीब छह माह बाद इसी वारदात में नया मोड़ आया। युवती अपने घर से भागकर खरखौदा थाने पहुंची और परिजनों से जान का खतरा बताया। जिस पर पुलिस ने किशोरी को कोर्ट के समक्ष पेश किया। किशोरी ने कलीम से शादी करने की बात कही और धर्मांतरण, गैंगरेप के मामले को फर्जी बताया। किशोरी नाबालिग थी, जिसके चलते कोर्ट ने उसको नारी निकेतन भेज दिया।
एसओ खरखौदा पीयूष दीक्षित ने बताया कि किशोरी बालिग हो गई। जिस पर कोर्ट ने शनिवार को उसके बयान दर्ज किए व उसकी इच्छानुसार कलीम के साथ रहने की इजाजत दी। कोर्ट के आदेश पर महिला पुलिस की सुरक्षा में युवती खरखौदा थाने पहुंची। स्थानीय पुलिस व महिला पुलिस की सुरक्षा में उलधन गांव में कलीम के घर पहुंची। कलीम हापुड़ अड्डा चौराहे के पास अपने रिश्तेदार के पास रहता है।