चर्चित डॉ. शालिनी आर्य हत्याकांड में पुलिस ने आखिरकार चार्जशीट में खेल कर ही दिया। गुपचुप तरीके से दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने आरोपी डॉक्टर पति विशाल आर्य के खिलाफ हत्या की धारा हटा दी। चार्जशीट केवल डॉ. विशाल के खिलाफ दी गई। जिसे डॉ. शालिनी को आत्महत्या के लिए उकसाने और महिला उत्पीड़न का आरोपी बनाया गया है। उधर, चार्जशीट पर पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाते हुए पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया। कहा कि चार्जशीट का कोर्ट में विरोध करेंगे और अपना जवाब पेश किया जाएगा।
यह था मामला
विगत 30 अगस्त की रात ढाई बजे थाना सदर बाजार क्षेत्र थापरनगर निवासी एमडी मेडिसिन डॉ. शालिनी आर्य को उनके पति डॉ. विशाल आर्य ने सुशीला जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उनकी एक सितंबर को मौत हो गई थी। डॉ. शालिनी के पिता राकेश कोड़ा ने डॉ. विशाल और शालिनी की सास वीना के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, हत्या समेत अन्य धाराओं में सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी डॉ. विशाल को जेल भेजा। जबकि वीना को पुलिस तीन माह बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। न ही 15 अक्तूबर को कुर्की नोटिस की समयसीमा समाप्त होने के बाद भी उसके घर की कुर्की तामील कराई।
पुलिस का दावा, यह आत्महत्या
इस केस के विवेचक इंस्पेक्टर सदर गजेंद्र पाल सिंह का कहना है कि प्रकरण में संयुक्त निदेशक अभियोजन से विधिक राय ली गई थी। जिन्होंने तथ्यों और सबूतों को देखते हुए मामला हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या के लिए उकसाने और महिला उत्पीड़न का माना है। विधिक राय के बाद डॉ. विशाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और महिला उत्पीड़न करने की धारा में सीजेएम राजेश कुमार की अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। सह अभियुक्त वीना आर्य के खिलाफ विवेचना अब भी विचाराधीन है। साथ ही पुलिस ने 28 गवाहों की सूची भी कोर्ट में दाखिल की है।
कोर्ट ने खारिज की थी अर्जी
बता दें कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने से पहले कोर्ट में अर्जी डाली थी कि डॉ. विशाल के खिलाफ रिमांड हत्या के बजाए आत्महत्या का बनाया जाए। जिसका पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता हर्ष कुमार ने पुरजोर विरोध किया था। जिस पर कोर्ट ने पुलिस के प्रार्थना को खारिज कर दिया था।
हर कदम पर बचाया आरोपी
डॉ. शालिनी हत्याकांड में सदर थाना इंस्पेक्टर पहले ही दिन से आरोपों के घेरे में रहे हैं। पुलिस ने पहले तो रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद भी डॉ. विशाल और वीना को फरार होने का पूरा मौका दिया। इसके बाद सुबूतों को मिटाने का भी विशाल को मौका दिया गया। यही वजह है कि पुलिस तुरंत ही घटनास्थल पर नहीं गई और मौके से सुबूत जुटाने के भी प्रयास नहीं हुए। पुलिस ने डॉ. विशाल की नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी की और घटना के 16 दिन बाद घर की तलाशी की खानापूर्ति की। 16 दिन बाद हुई तलाशी में पुलिस को मौके से कोई सुबूत नहीं मिले।
बड़ा सवाल गोल कर गई पुलिस
आगरा एफएसएल की विसरा रिपोर्ट के तहत डॉ. शालिनी की मौत सल्फास खाने से हुई। सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि अगर डॉ. शालिनी ने सल्फास खाया तो फिर उसका रैपर, पैकेट या शीशी कहां गई। पुलिस इसका जवाब तक नहीं दे पाई।