शिक्षिक-शिक्षिकाओं की भूमिका की जांच
निलंबित किए गए शिक्षक-शिक्षिकाओं की भूमिका की जांच भी की जा रही है। अभी तक की पुलिस जांच में शिक्षकों की लापरवाही उजागर हो चुकी है। पीड़ितों ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें रुपये देने की पेशकश की थी।
रमाला थाना पुलिस सवालों के घेरे में
सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने अदूरदर्शिता से काम लिया। जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। अभी तक यह सामने आया है कि पुलिस ने मामले को फर्जी बताते हुए पीड़ित परिवार पर फैसले का दबाव बनाया था। पुलिस अफसरों को झूठा आरोप बताकर गुमराह किया। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद उनकी लापरवाही सामने आई।
खेल-खेल में जघन्य वारदात बेहद शर्मनाक
महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि जिस तरह खेल-खेल में बच्चे ऐसा काम कर जाते हैं यह बेहद शर्मनाक और सोचनीय है। जिस तरह वारदात हुई है, वह बेहद चिंतित करने वाला है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे इस तरह की घटनाएं कर रहे हैं, यह समाज के लिए ठीक नहीं है।
आरोपियों के पिता बोले, उनके बच्चे निर्दोष
आरोपी छात्रों के पिता का कहना है कि तीनों बच्चे निर्दोष हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा गया है। गलत तरीके से उन्हें फंसाया गया है। छात्रा के परिवार ने इस प्रकरण में पहले समझौता कर लिया, लेकिन इसके बाद अचानक वह छात्रा को लेकर अस्पताल पहुंच गए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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