मेरठ। फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के पकड़े जाने के बाद हजारों छात्रों पर भी तलवार लटक सकती है। आखिर जिन छात्रों ने फर्जी तरह से मार्कशीट बनवाई उनकी जांच पुलिस के लिए भी आसान नहीं होगी। फर्जी मार्कशीट प्रकरण में सभी विश्वविद्यालयों को पुलिस नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। अफसरों का कहना है कि नोटिस का जवाब आने के बाद ही विवेचना में नाम शामिल किये जाएंगे।
कंकरखेड़ा पुलिस ने छह राज्यों के 16 कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का बृहस्पतिवार को पर्दाफाश किया था। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने प्रेसवार्ता में इसका खुलासा करते हुए बताया था कि आरोपी हाईस्कूल, इंटर और स्नातक की फर्जी मार्कशीट बना रहे थे। यूपी व सीबीएसई बोर्ड का गजट भी आरोपियों के पास से मिला था।
एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि कविनगर, गाजियाबाद निवासी रूप सिंह गिरोह का सरगना है। जो गाजियाबाद के संजय नगर में एक साइबर कैफे में फर्जी मार्कशीट बनाता था। पुलिस ने शुक्रवार रात भी उसकी तलाश में गाजियाबाद दबिश दी। लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस ने रात में मवाना में दबिश देकर दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
एसपी सिटी ने बताया कि पांचों पकड़े गए आरोपी उमाशंकर, सलमान, अजय, अनिल कुमार और राजेश को जेल भेज दिया गया था। जो 173 फर्जी मार्कशीट, दो गजट हाईस्कूल-इंटर यूपी बोर्ड जिला सहारनपुर, चार उत्तर पुस्तिकाएं मिली थी इस पर जांच शुरू कर दी गई है। एसपी सिटी ने बताया कि सभी यूनिवर्सिटियों और जिन बोर्ड का गजट और मार्कशीट मिली हैं उनको नोटिस भेजे जाएंगे। पुलिस का कहना है कि फर्जी मार्कशीट प्रकरण में शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों की भी भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। अफसरों ने कहा था कि अलग-अलग राज्यों में दस हजार से ज्यादा फर्जी मार्कशीट यह गिरोह बांटकर मोटी रकम वसूल चुका है। जिसमें एनएसयूआई का छात्रनेता उमाशंकर खुद भी पीएचडी कर चुका है। ऐसे में पुलिस ने उमाशंकर की पीएचडी की डिग्री की भी जांच की है।
खास बातें:
फर्जी मार्कशीट गैंग प्रकरण में एसपी सिटी ने कहा
नोटिस का जवाब आने के बाद विवेचना में शामिल होंगे नाम