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मीवा गांव में जातीय संघर्ष को रोकने का प्रयास, समिति रखेगी नजर

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मवाना। मीवा गांव में चल रहे जातीय संघर्ष पर विराम लगाने के लिए पुलिस व प्रशासन अलर्ट हो गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए शुक्रवार को तहसील सभागार में बैठक की। जिस पर दोनों पक्षों ने अपनी राय रखीं। प्रशासन ने दो टूक जवाब देते हुए संघर्ष को हवा देने वाले लोगों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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बताते चलें कि मीवा गांव में वर्चस्व की जंग को लेकर दो जातियों के युवाओं में संघर्ष चला आ रहा है। जिस कारण अब तक दोनों पक्षों की ओर से कई मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। बृहस्पतिवार देर रात भी दबाव बनाने के लिए दोनों पक्षों की ओर से गांव में जमकर फायरिंग की गई। जिससे दहशत उत्पन्न हो गई। सूचना पाकर एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव के साथ सीओ मवाना अखिलेश भदौरिया पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और दोनों पक्षों के साथ बैठकर बातचीत की थी। इस मामले में शुक्रवार को दोनों पक्षों की गांव में एक पंचायत हुई। जिसमें दोनों पक्षों ने मामले का निपटारा करने के लिए अपने सुझाव दिए। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से गांव के गणमान्य लोग तहसील पहुंचे और तहसील सभागार में एसडीएम व सीओ के नेतृत्व में बैठक आयोजित की गई। दोनों ओर से अपनी अपनी राय दी गई। एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि झगड़े से गांव की फिजा बिगड़ रही और अन्य ग्रामीणों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। झगड़ा करने वाले पुलिस व प्रशासन को हल्के में न लें। यदि आगे कोई झगड़ा किया गया तो सख्त कार्रवाई की जायेगी। वहीं, ग्रामीणों ने भी आपस में बैठकर मामले को निपटाने का आश्वासन दिया। इस दौरान गुर्जर समाज की ओर से पूर्व प्रधान रामसिंह, ब्रजपाल, रकम सिंह, रामपाल, राम अवतार, विष्णु, जगबीर व दलित समाज की ओर से मौजूदा प्रधान तीर्थराम, पूर्व प्रधान धर्मवीर, पवन, निरंजन, जयचंद फौजी आदि मौजूद रहे।
मीवा के चौराहे पर कैमरे लगाने के निर्देश
तहसील सभागार में बैठक के दौरान ग्रामीणों ने गांव के कुछ युवकों के गांव के चौराहे पर खड़े रहने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि चौराहे पर खड़े होने वाले युवक ही आए दिन झगड़े का कारण बन रहे है। इस पर एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव ने चौराहे पर कैमरा लगवाने के प्रधान को निर्देश दिए और पुलिस को ऐसे युवकों को चिह्नित करने के आदेश दिए।
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गुड़मंडी में पुलिस बल तैनात करने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि झगड़ा अक्सर गुड़मंडी से शुरू होता है। दरअसल उनके गांव के कुछ युवक गांव से स्कूल के लिए आते है, परंतु स्कूल न पहुंचकर गुड़मंडी में बैठे रहते है। जहां गांव के दूसरी बिरादरी के आने वाले युवकों के साथ मारपीट की जाती है। झगड़े की शुरुआत भी यहीं से हुई थी, जो जातीय संघर्ष में बदल गई। इस पर सीओ अखिलेश भदौरिया ने थाना प्रभारी मनीष बिष्ट को गुड़मंडी में पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए।
झगड़ा करने वालों पर समिति रखेगी निगरानी
बैठक में एसडीएम व सीओ ने ग्रामीणों को एक समिति बनाने के निर्देश दिए। जिसमें गांव की हर बिरादरी के गणमान्य लोगों को शामिल करने के लिए कहा गया। समिति में शामिल लोगों की सूची एसडीएम व थाना प्रभारी को उपलब्ध कराई जायेगी। यह समिति गांव के उन युवकों पर नजर रखेगी जो झगड़े का कारण बने हुए है। यदि कोई झगड़ता है तो उनको पहले समझाया जायेगा। यदि समिति की बात नहीं मानी जाती तो पुलिस ऐसे युवकों पर कार्रवाई करेंगी। ताकि गांव की फिजा न बिगड़ सके।
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मुख्य बातें
समिति की बात न मानने वाले पर होगी कार्रवाई
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