फलावदा। थाने में तैनात हेड कांस्टेबल के साथ हुई मारपीट एवं लूटपाट के मामले में पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है। पुलिस की कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। जब पुलिसकर्मी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई तो आमजन के साथ पुलिस का रवैया कैसा होता है।
उल्लेखनीय है कि फलावदा थाने में तैनात हैड कांस्टेबल मंसूर अहमद के साथ शुक्रवार को एक दर्जन लोगों ने मारपीट करके पर्स, सोने की अंगूठी एवं साढे़ सात हजार रुपये लूट लिये थे। इतना ही नहीं मंसूर द्वारा आई कार्ड दिखाने पर हमलावरों ने उसे फर्जी बताते फाड़ डाला था। पीड़ित ने थाने पहुंचकर घटना के संबंध में तहरीर दी, लेकिन घटनास्थल थाना खतौली का बताते हुए टरका दिया था। पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने खतौली थाने पहुंचा तो उसके साथ एक दरोगा ने अभद्रता की। उसे थाने से बाहर निकल जाने की चेतावनी दी थी। पीड़ित ने दरोगा के व्यवहार पर ऐतराज जताया तो दरोगा ने हवालात में बंद करने की धमकी भी दी। इस पर पीड़ित मायूस होकर लौट गया। उधर, पीड़ित कांस्टेबल मंसूर अहमद विभागीय लोगों के रवैये एवं अपनी बेइज्जती से डिप्रेशन में है। दरोगा का कहना है कि कांस्टेबल घटना में राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार हो रहा है।