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21 साल के जरायम का अंत

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21 साल के जरायम का अंत
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सहारनपुर/छुटमलपुर। शकलापुरी मार्ग पर मुठभेड़ में मारे गए बदमाश आबाद का 21 साल का आपराधिक इतिहास रहा, जिसका अंत हो गया। आबाद पर पहला मुकदमा फतेहपुर थाना क्षेत्र में 1999 में लूट का दर्ज किया गया था। इसके बाद वह अपराध के दलदल में और गहरा उतरता गया।
आबाद पर 1999 से लेकर अब तक उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में लूट के मामलों के अलावा जिले के कई थानों में आपराधिक केस दर्ज किए गए। आखिरी मुकदमा लूट का बेहट कोतवाली में 2019 में लिखा गया था। उस पर हत्या, लूट, जानलेवा हमले, गुंडा एक्ट सहित 18 से अधिक केस दर्ज हैं। आबाद फतेहपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर था।
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दो साल पहले भी ढेर किए थे बदमाश
दो साल पहले सरसावा क्षेत्र के इब्राहिमपुरा में थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने एक ही मुठभेड़ में दो इनामी बदमाशों ओमपाल लुहारी और सुमित को ढेर कर दिया था।
गांव में पुलिस तैनात
फोटो-21
आबाद का शव मंगलवार शाम पांच बजे गांव दतौली मुगल में पहुंच गया था। एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। फतेहपुर थानाध्यक्ष मनोज चौधरी के साथ एसओ चिलकाना अमित शर्मा को लगाया गया था। देर रात तक शव को सुपुर्दे खाक करने की तैयारी चल रही थी।
इस बार पैर नहीं, सीने और गर्दन में लगी गोलियां
पिछले एक साल में पुलिस मुठभेड़ के अधिकतर मामलों में अपराधियों के पैर में गोली मारती आ रही थी। इनामी बदमाश घायल होते थे। लेकिन इस बार बदमाश आबाद के सीने और गर्दन में गोली मारी।
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रामस्वरूप की हत्या में हुआ था नामजद
आबाद पांच सितंबर 2011 में फतेहपुर थाना क्षेत्र के गांव बेहडा संदल निवासी अनुसूचित समाज के रामस्वरूप की हत्या में नामजद किया गया था। राम स्वरूप की पत्नी ज्ञानो देवी ने आबाद, मोमीन और टीकम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दो तो जेल चले गए थे। आबाद उसके बाद से फरार था। पुलिस ने उसके घर की कुर्की कराई थी। 50 हजार का इनाम भी घोषित किया था।
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