उधर, पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों के शव शनिवार को सुबह करीब 11 बजे गांव में पहुंचते की उमरपुर गांव का माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों व महिला के मायके वालों और जब्बार के रिश्तेदारों ने बच्चों के शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया। ग्राम प्रधान अतहर हसन ने बताया कि गंभीर हालत में महिला को मेरठ से दिल्ली रेफर किया गया है।
बच्चों को मिट्टी देना भी नहीं हुआ नसीब
उमरपुर गांव में पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों के शव गांव में पहुंचे तो पूरा गांव घटना के कारण गम में डूबा हुआ था। बच्चों का पिता जब्बार गुजरात के अहमदाबाद में कपड़े की फेरी लगाता है। वह भी गांव में नहीं पहुंच पाया था। बच्चों के साथ आत्मदाह करने वाली नसीमा दिल्ली चिकित्सालय में जिंदगी व मौत के बीच जूझ रही है। बच्चों के शव दफनाने के बाद अहमदाबाद से पहुंचा जब्बार को इस बात का गम है कि उसे बच्चों को मिट्टी देना भी नसीब नहीं हुआ।
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