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गौरक्षक आसिफ हत्याकांड: गोकशी के खिलाफ आंदोलन चलाने पर की थी बड़े भाई की हत्या, अब छोटे भाई को भी मारी गोली

Sat, 08 Jul 2023 07:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में गोकशी के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले दिलशाद भारती की आठ साल पहले जिस तरह हत्या की गई थी,उसी तरह उनके छोटे भाई गौरक्षक आसिफ भारती की शनिवार को गोली मारकर सरेराह हत्या कर दी गई।
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murder - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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27 जून 2017 को मेरठ में गौरक्षक दल के सदस्य दिलशाद भारती की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब इसी तरह दिलशाद के छोटे भाई आसिफ भारती की भी सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। शनिवार को लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र में हुई हत्या से सनसनी फैल गई। आसपास के लोग मौके पर दौड़े लेकिन हमलावर फरार होने में कामयाब हो गए। लोगों ने आसिफ भारती को अस्पताल में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 
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लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के भूमिया पुल पर हुई हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। पुलिस ने आरोपियों की तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस के अनुसार पुरानी रंजिश में हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है।

Asif Bharti murder - फोटो : Amar Ujala
गोकशी के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले दिलशाद भारती की गो तस्करों द्वारा 27 जून 2015 को सिर पर गोली मार दी गई थी, जिसके बाद अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उस समय परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा भी किया था। इलाके में तनाव के कारण पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी।

लिसाड़ीगेट क्षेत्र के नीचा सद्दीकनगर निवासी दिलशाद भारती (35) पुत्र शकील अहमद को गोली मारने के मामले में दानिश, हाजी छोटू, दिलशाद, नदीम, इस्लामुद्दीन और महराज को नामजद किया गया था। परिजनों का कहना था कि दिलशाद लिसाड़ीगेट क्षेत्र में होने वाली गोकशी का विरोध करता था। इसके चलते उसे गोली मारी गई थी। परिजन सात महीने से दिलशाद का मेरठ से लेकर दिल्ली तक इलाज करा रहे थे।

Asif Bharti murder - फोटो : Amar Ujala
भाई की हत्या पर आसिफ ने खाई थी गौरक्षा की कसम
भाई की हत्या के बाद छोटे भाई आसिफ ने गौरक्षा की कसम खाते हुए कहा था कि हम मुसलमान हैं, लेकिन गोरक्षा करना हमारा धर्म है। मेरे भाई ने गोरक्षा करते-करते अपनी जान दे दी। गोवंश को बचाना उसने अपना मकसद बना लिया था। इसीलिए उसने शादी भी नहीं की थी। गोकशी का धंधा मंदा पड़ने लगा तो पुलिस ने ही आरोपियों से मिलकर दिलशाद को गोली मरवाई।

दिलशाद ने जान का खतरा बताकर पुलिस से सुरक्षा भी मांगी थी। ये आरोप दिलशाद भारती के भाइयों ने पुलिस पर लगाए थे। उसने यह भी कहा कि उसे लगातार आरोपियों से धमकियां मिल रही है कि जिस तरह दिलशाद की हत्या की है इसी तरह उसकी भी गोली मारकर हत्या कर दी जाएगी। आखिरकार आठ साल बाद सरेबाजार आसिफ भारती को भी आरोपियों ने सरेराह गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया।

Asif Bharti murder - फोटो : Amar Ujala
आसिफ के भाई दिलशाद के पास थी मिनी कमेलों की सूची
बता दें कि मेरठ के लिसाड़ीगेट में साल 2015 में कई कमेले चालू थे, इन पर कार्रवाई शुरू हुई तो दिलशाद भारती ने गौरक्षा का जिम्मा उठाया और कमेलों की लिस्ट पुलिस को थमानी शुरू कर दी। इस दौरान लिसाड़ीगेट में चल रहे 28 मिनी कमेलों की सूची दिलशाद भारती ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, एसएसपी और थाना पुलिस को सौंपी थी। लगातार कमेलों पर छापामारी से परेशान होकर गोकशी करने वालों ने दिलशाद की हत्या करने की प्लानिंग कर ली थी। गोकशी करने वालों ने चंदा करके भाडे़ के शूटरों से गोली मरवाई थी।

दिलशाद ने गोहत्या करने वालों की सूची बनकर अभियान छेड़ रखा था। दिलशाद के साथ आठ और लोग भी शामिल थे। इसमें पांच मुस्लिम और तीन हिंदू संगठन के कार्यकर्ता थे। 18, 19, 20 व 21 नवंबर और 30 दिसंबर 2013 को दिलशाद की दी गई सूचना पर पुलिस ने छापामारी कर आठ मिनी कमेले पकड़े थे। इनसे गोमांस भी बरामद हुआ था। रियाजुद्दीन और उसके बेटे दानिश ने लिसाड़ीगेट के गली में मांस बेचने की दुकान तक खोल रखी थी।
 
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आसिफ भारती - फोटो : अमर उजाला
12 अप्रैल 2014 को दिलशाद ने ऊंचा सद्दीकनगर में रियाजुद्दीन के मिनी कमेले पर छापा डलवाया। यहां से तीन जिंदा गाय और भारी मात्रा में गोमांस मिला था। इसके बाद ही गोकशी करने वालों ने दिलशाद और उसके अभियान में शामिल लोगों की हत्या की साजिश रच ली। दिलशाद और उसके साथियों के घरों में धमकी भरी चिट्ठी भी फेंकी गई।

इसके बाद दिलशाद ने 26 मई 2014 को दस मिनी कमेले पकड़वाए। इसके बाद ही दिलशाद को गोली मार दी गई। इसके बाद भी 10 अगस्त को ऊंचा सद्दीकनगर में आठ कमेले पकड़े गए। एक जनवरी को भी तीन मिनी कमेलों का भंडाफोड़ हुआ। तीन दिन पहले भी रहीसुद्दीन का मिनी कमेला पकड़ा था।

भाई की हत्या के बाद से आसिफ ने गोकशी करने वालों के खिलाफ बीड़ा उठाया हुआ था। वह गौरक्ष दल का सक्रिय सदस्य था। आसिफ भारती (36) की भी बिल्कुल इसी तरह से हत्या की गई है जिस तरह दिलशाद भारती की हत्या की गई थी। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
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