भूख और बीमारी से मर रहीं हैं गाय
जिला प्रशासन के 23 मार्च 2022 के आंकड़ों के अनुसार अस्थायी गोआश्रय स्थल कपसाड़ में गाय और गोवंश की संख्या 209 दिखाई गई है। गोशाला में कमेटी की तरफ से पहुंचे सदस्य बसंत ने बताया कि वर्तमान में गो आश्रय स्थल में 198 गोवंश हैं। प्रतिदिन तीन से चार पशु आते हैं। बड़ी संख्या में गोवंश की यहां टैगिंग भी नहीं मिली। छह से सात दिन में दो- तीन पशुओं की मौत हो जाती हैं। यहां गोवंश की संख्या सरकारी आंकड़ों से कम हैं, जिसका कारण पशुओं का भूखा और बीमारी से मरना है।
सफाई का अभाव, खुले में बंधीं ज्यादातर गाय
गो आश्रय स्थल में एक स्थान पर टीन शेड था और एक हॉल बना हुआ था। ज्यादातर गाय खुले में ही बांधी गई थीं। पीने को स्वच्छ पानी और और सफाई का अभाव होने के कारण हर तरफ गंदगी और गोबर पड़ा था। सालों से पानी की चर की सफाई नहीं हुई थीं।
दो माह से पैसा नहीं मिला
गो आश्रय स्थल में 198 गोवंश की देखभाल के लिए तीन कर्मचारी तैनात हैं। गोवंश के लिए चारा नहीं है, भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। बारिश के कारण चारा खराब हो गया है। दो माह से पैसा भी नहीं मिला है। उधार सामान खरीदकर गायों की देखभाल की जा रही है। - रामभूल, प्रधान पति, कपसाड़
उधार भूसा खरीदकर गायों को खिला रहे
रविवार को छुट्टी के कारण बीमार पशुओं को देखने के लिए चिकित्सक नहीं आए हैं। हरा चारा उपलब्ध नहीं हैं। उधार भूसा खरीदकर गायों को खिलाया जा रहा है। - अरुण सैनी, सचिव, गो आश्रय स्थल कपसाड़