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आश्रय स्थलों में मर रहे गोवंश

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खरखौदा/माछरा। कड़ाके की ठंड में गोआश्रय स्थलों में पशुओं के ठीक से रखरखाव न होने के चलते पशुओं की मौत हो रही है। खरखौदा और माछरा गोआश्रय स्थल में बीमार दो पशुओं की मौत हो गई, वहीं कई पशु बीमार हैं।
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लोगों के मुताबिक किसान दूध न देने वाली गायों, छोटे बछड़ों को छोड़ देते हैं। जिसके चलते वह खेतों में नुकसान करते हैं या फिर रास्तों पर घूमते दिखते हैं। पिछले साल इन पशुओं के लिए गोआश्रय स्थल बनाए गए। बड़ी मात्रा में इन पशुओं को वहां पकड़कर रखा जा रहा है। समय से चारा, पानी व मौसम से बचाव के उपाय ठीक न होने से बड़ी मात्रा में पशु बीमार है। हालांकि पिछले दिनों कुछ इच्छुक किसानों को गोआश्रय स्थल से पशुओं को पालने के लिए दिया गया। उसके लिए नौ सौ रुपये प्रति माह देने की बात कही गई। अभी गोआश्रय स्थलों में ठंड से बचाव की उचित प्रबंध न होने से काफी पशु बीमार है। खरखौदा के धीरखेड़ा गांव में चरागाह की जमीन पर गोआश्रय स्थल बना दिया गया। टीनशेड लगाया गया। हालांकि ठंड से बचाने के लिए प्लास्टिक की तिरपाल की व्यव्सथा की गई। लेकिन ठंड में बीमार हुए पशु मर रहे हैं। बृहस्पतिवार को एक पशु की मौत हो गई।जबकि करीब एक दर्जन बीमार हैं। वहीं, माछरा क्षेत्र के पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बने आश्रय स्थल में 35 गोवंश हैं। एक गोवंश की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। जबकि काफी पशु बीमार हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि गोवंश को पूरा पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है और उनके बैठने के स्थान पर कच्ची जमीन न होकर पक्का खड़ंजा है जिस कारण वह परेशान है। पौष्टिक आहार नहीं मिलेगा गौवंश परेशान रहेगा। गांव कासमपुर ग्राम प्रधान शिवराज भाटी ने बताया कि गोवंश को सही चारा व ठंड से बचाव की व्यवस्था की गई है। गोवंश कमजोर होने के चलते उनकी मौत हो रही है। दूसरी ओर एडीओ पंचायत मनोज कुमार सिंह ने बताया कि शासन के आदेशानुसार गोआश्रय स्थल पर सभी व्यवस्थाएं की गयी है। वहीं समय समय पर पशुओं की जांच व इलाज भी कराया जा रहा है। लेकिन ठंड अधिक होने के कारण बीमार पशु ठंड की चपेट में आ रहे हैं।
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