उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जनपद के सिखेड़ा थाना क्षेत्र में 18 साल पहले भंडूर पुलिस चौकी फूंकने और पथराव की घटना में अदालत ने 26 आरोपियों को दोषी करार देकर 25 लोगों को पांच-पांच साल और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया। एक गैर हाजिर रहा, जिसके एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) जारी किए हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सिखेड़ा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी बीपी सिंह ने आठ मई 2002 को मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि गांव भंडूर निवासी सोहनबीर का अपहरण हो गया था। मामले में आरोपी निर्मल सिंह, सतनाम सिंह और जसबीर सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस चौकी में बंद कर दिया था। इसके बाद हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी को घेर लिया और अभियुक्तों को ग्रामीणों के हवाले करने की मांग की। पुलिस द्वारा इनकार करने पर भीड़ ने हमला कर पुलिस चौकी को आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छोटे लाल यादव की अदालत संख्या-12 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) सीताराम आर्य ने 12 गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने मंगलवार को दोनों पक्षों को सुनते हुए 26 आरोपियों को पुलिस चौकी फूंकने व संपत्ति को हानि पहुंचाने के मामले में दोषी करार दिया है। एक आरोपी भंडूर निवासी हरवंशा के कोर्ट में पेश न होने पर उसकी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। बुधवार को सजा पर सुनवाई हुई। एडीजीसी के अनुसार अदालत ने 25 आरोपियों को पांच पांच साल की कैद और तीन- तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इन आरोपियों को हुई सजा
भंडूर निवासी विपिन कुमार, तेजपाल, बिल्लू, बिजेंद्र, उदयराम, राजपाल, मुकेश, जयपाल, संजीव, पूरन, योगेंद्र, मनोज, ललित, मुनेश, कैलाश, हरवंश, विजयपाल, मनोज पुत्र ओमप्रकाश, जगन, दिलशाद, साजिद, विजयकांत, बिहारी गांव निवासी लियाकत, मिर्जा टिल्ला निवासी नीटू और नेहरू।
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