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कोर्ट ने महिलाओं को छोड़ा, पुलिस को लगाई फटकार, कहा-'कानून की अवहेलना'

Sun, 31 Mar 2019 07:46 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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 चोरी के आरोप में दो महिलाओं को गिरफ्तार कर शनिवार शाम कोर्ट में लेकर पहुंची कंकरखेड़ा पुलिस को सीजेएम अभय प्रकाश नारायण की अदालत ने फटकार लगा दी। सीजेएम ने विवेचक द्वारा संतोषजनक उत्तर न देने तथा कानूनी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर दोनों महिलाओं का न्यायिक रिमांड खारिज कर छोड़ने और उच्चाधिकारियों को थाना कंकरखेड़ा पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार गोविंदपुरी, मोदीनगर (गाजियाबाद) निवासी अंकुर त्यागी ने 30 मार्च 2019 की दोपहर 2:50 बजे ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी शादी 11 मार्च 2019 को हुई थी। जिसके बदले में उसने अपनी पत्नी को 1.70 लाख रुपये दिए थे।

बाद में पत्नी जेवर लेकर गायब हो गयी। जिसका मुकदमा थाना कंकरखेड़ा में दर्ज करने पर पुलिस ने तुरंत ही गिरफ्तार कर दारोगा रोबिन कुमार को उसके रिमांड के लिए कचहरी भेजा गया।
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इससे प्रतीत होता है कि वादी द्वारा 1.70 लाख रुपये रुपये दहेज में दिए गए या उक्त धनराशि द्वारा महिला को खरीदा गया। जिस पर अदालत ने माना कि यह कृत्य वादी का कार्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन थानाध्यक्ष कंकरखेड़ा ने वादी के खिलाफ कोई कार्रवाई न करके वैवाहिक संबंधों पर आधारित मामले में पत्नी और उसकी सहयोगी महिला को धोखाधड़ी व चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस ने प्रतिवादी के महिला होने का भी ख्याल न रखकर सात साल से कम सजा के अपराध की रिपोर्ट लिखने के तुरंत बाद ही उसी दिन गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश कर दिया। 

जो थाना कंकरखेड़ा की पुलिस की मिलीभगत प्रतीत होती है और अनुचित लाभ लेकर गिरफ्तार किया गया है या किसी अन्य दबाव के चलते कार्य किया है। अदालत ने न्यायिक रिमांड पर सुनवायी के बाद आदेश में कहा कि जो स्त्री धन पत्नी को शादी में दिया गया है, अंतिम रूप से उस पर पत्नी का ही हक होता है। 

एक हिंदू विवाहिता का अपना ही स्त्रीधन चोरी करने की परिभाषा में नहीं आता है। धोखाधड़ी में पुलिस द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नही किया गया। इस कारण दोनों महिलाओं को चोरी व धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाना विधि सम्मत नही है। न्यायिक रिमांड निरस्त कर दोनों महिलाओं को रिहा किया जाता है।
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पुलिस ने की कानून की अवहेलना

सीजेएम ने पारित आदेश में कहा कि थानाध्यक्ष कंकरखेड़ा तथा विवेचक द्वारा कानूनी प्रक्रिया 41बी सीआरपीसी व सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित निर्देशों एवं मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन नही किया है। 

महिलाओं की गिरफ्तारी के समय न तो कोई साक्ष्य व गवाह आदि कराए  और न ही उनके परिजनों को कोई सूचना दी गयी, न ही उनके हस्ताक्षर कराए गए। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि थानाध्यक्ष कंकरखेड़ा तथा दरोगा द्वारा उच्चतम न्यायालय के अनुपालन में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। जो घोर आपत्तिजनक के साथ उच्चतम न्यायालय की अवमानना है।

 इस मामले में एसएसपी मेरठ को आदेशित किया गया है कि वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जांच कराकर कंकरखेड़ा के दोषी पुलिस कर्मचारीगण को दंडित कर न्यायालय को 15 दिन के अंदर सूचित करें तथा आदेश की प्रति प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी और डीजी अभियोजन को भेजी जाए।
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