- अब एससीएसटी कोर्ट में होगी मुकदमे की सुनवाई, वापस जेल भेजा जाएगा
- 8 जनवरी को आरोपी ने युवती के अपहरण के दौरान उसकी मां की हत्या की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ कांड के आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर दोनों पक्षों के वकील पांच महीने से अपनी दलील रख रहे थे। मगर बुधवार को किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) ने आरोपी को बालिग घोषित कर दिया है। मेडिकल रिपोर्ट के आकलन के बाद पारस सोम की उम्र वारदात के वक्त 18 साल, 7 महीने और 26 दिन निकलकर आई है। अब पारस सोम को बाल संप्रेक्षण गृह से मुख्य जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। केस की आगे की कार्रवाई भी अब जेजे बोर्ड में ना होकर मुख्य न्यायालय (एससी-एसटी कोर्ट) में होगी।
कपसाड़ गांव निवासी नरसी ने सरधना थाने पर प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि 8 जनवरी 2026 को उसकी मां सुनीता व उसकी बहन रूबी खेत पर काम कर रही थी। इसी दौरान गांव के ही आरोपी पारस सोम ने रूबी का अपहरण कर लिया। मां सुनीता ने विरोध किया तो आरोपी ने उसके सिर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। परिजनों ने सुनीता को मोदीपुरम अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां उनकी मौत हो गई थी। जिसके बाद गांव में तनाव फैल गया था। पीड़ित परिवार व ग्रामीणों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग व सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया था। सूचना पर एडीजी, एसएसपी, एसपी देहात समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।
घटना के बाद गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर रूबी को तलाश कर आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया जबकि युवती को काउंसलिंग के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। हालांकि 25 मार्च को आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह में शिफ्ट कर दिया गया था।
आरोपी के परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया था।
मेडिकल में 19 वर्ष आई पारस की उम्र
जेजे बोर्ड के आदेश पर पारस सोम का 12 मई को मेडिकल कराया गया। मेडिकल में पारस सोम की उम्र निकलकर 19 वर्ष आई। क्योंकि यह परीक्षण वारदात के चार माह चार दिन बाद हुआ था, इसलिए मेडिकल में वारदात के वक्त की उम्र 18 वर्ष 7 माह 26 दिन निकलकर आई। पारस सोम के बालिग साबित होने के बाद जेजे बोर्ड ने प्रतिवादी पक्ष की अपील को खारिज कर दिया। किशोर न्याय बोर्ड ने स्पष्ट किया कि पारस सोम का जांच में नाबालिग होना नहीं पाया गया है।