शिक्षा, संस्कृति के उत्थान से होगा बुराई का अंत : अतुल कोठारी
शिक्षा उत्थान संस्कृति न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा के आधार पर ही भारत विश्व गुरु बने। लोग फिर से यहां पढ़ने के आएं ऐसी शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानोत्सव का उद्देश्य सकारात्मक कार्य करने वालों को एक मंच पर लाना है।
अच्छाई की लकीर को बड़ा करना होगा। ज्ञानोत्सव एक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का आंकलन चरित्र के आधार पर किया जाता है। गांवों में अभी अच्छाई बहुत है। यदि बुद्धिजीवी सरकार पर निर्भर होंगे तो लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य वर्ग में तरक्की का आधार भौतिक प्रगति माना जाता है। लेकिन भारत में चरित्र के आधार पर व्यक्तित्व का आंकलन होता है।
शिक्षक शिक्षा में लाएं गुणवत्ता : प्रो. तनेजा
कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता लाने का प्रयास करें। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा अच्छी नहीं होती है। इस प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि सरकारी स्कूलों में किस प्रकार से नवाचार किए जा रहे हैं। नवाचार प्रदर्शनी में सरकारी स्कूल के बच्चों ने जिस प्रकार से सृजनात्मक क्षमता दिखाई है लोग आकर देखें। अटल टंकरिंग लैब से जुड़कर बच्चे आगे बढे़ं। इस समय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है।