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UP की इस होनहार बेटी पर देश को होगा गर्व, ऐसा एप बनाया जो विश्वभर में मशहूर

Sun, 25 Feb 2018 11:46 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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हर्षिता अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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सफलता के लिए जरूरी नहीं है कि आप खूब पढ़ाई ही करें। यदि आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जुनून है और आपको किसी फील्ड की समझ है तो आप उस पर काम कर दुनिया में नेम और फेम दोनों कमा सकते हैं। ऐसा ही कुछ काम किया है सहारनपुर की बेटी हर्षिता ने। हर्षिता ने आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। मगर आईओएस प्लेटफार्म पर फाइनेंस के क्षेत्र में एक ऐसा एप तैयार किया, जिसने मात्र एक महीने में दुनिया भर में हर्षिता को पहचान दिलाई। इस एप को दुनिया के 32 देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ दिन तक यह एप दुनिया भर के अपने जैसे हजारों ऐप में टॉप पर रहा। अभी भी यह ऐप टॉप टेन में शामिल है। 

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अहमद बाग निवासी बिजनेसमैन योगेद्र सिंह अरोड़ा और जसविंदर कौर की एकलौती बेटी हर्षिता अरोड़ा दिल्ली रोड स्थित पाइनवुड स्कूल की छात्रा रही है। वर्ष 2016 में हर्षिता ने अचानक से नौवीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। पढ़ाई छोड़ने के पीछे उसका मकसद कुछ और था। एक दिन फेसबुक पर उसे सेल्सफोर्स के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वह सेल्सफोर्स में इंटर्नशिप करने बैंगलुरु चली गई। सेल्सफोर्स की इंटर्नशिप पूरी करने के बाद उसने अमेरिका के मशहूर तकनीकी संस्थान से एमआईटी लांच का समर प्रोग्राम किया। अमेरिका से लौटने के बाद वह सीधे सहारनपुर पहुंची। यहां उसने फाइनेंस कैटेगरी के लिए एप तैयार करने की सोची। इसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के अविरल अग्रवाल ने उनकी मदद की। साथ ही बैंगलुरु में दसवीं की पढ़ाई कर रहे साथी हर्षदीप ने भी साथ दिया। दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद हर्षिता ने क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर नाम से एप तैयार किया। 28 जनवरी 2018 को यह एप लांच किया गया। मात्र एक महीने में एप को अमेरिका समेत करीब 32 देशों के लोग डाउनलोड कर इस्तेमाल में ला चुके हैं। कई दिन तक यह एप बिजनेस क्षेत्र के लोगों की नंबर एक पसंद रहा। फिलहाल यह टॉप टेन में काम कर रहा है।

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एप के फायदे 

ऐप - फोटो : अमर उजाला
हर्षिता ने बताया कि क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर एप में दस से 12 मेजर फीचर्स हैं। 32 देशों के एक हजार से ज्यादा क्रिप्टाकैरेंसी के कीमतों के उतार चढ़ाव को बताता है। जिनका इस्तेमाल लोग अपने-अपने बिजनेस के हिसाब से कर सकते हैं। मुख्य रूप से इस एप का इस्तेमाल फाइनेंस के क्षेत्र में किया जाता है। इस एप से करेंसी को चेंज कर सकते हैं। स्टॉक मार्केट के लोगों के लिए भी यह ऐप कई दिन तक लगातार पहली पसंद रहा है। 
 
एक महीने में 1700 अमेरिकी डॉलर की इनकम 
हर्षिता के एप को मात्र एक महीने में 32 देशों के हजारों लोगों ने डाउनलोड किया है। इस डाउनलोडिंग से हर्षिता को खासी कमाई भी हुई है। बकौल हर्षिता अभी तक 1700 अमेरिकी डॉलर उसके अकाउंट में आए हैं और इनकम का यह सिलसिला जारी है। हालांकि हर्षिता का मकसद मात्र रुपये कमाना नहीं है। वह एप के क्षेत्र में दुनिया को ऐसे ऐप देना चाहती है जो अन्य ऐप की तुलना में लोगों के अधिक मददगार बनें। 
 
हर्षिता में और बच्चों से अलग जुनून दिखा 
हर्षिता के कंप्यूटर टीचर मिधुन भी हर्षिता की सफलता से गदगद हैं। वर्तमान में बैंगलुरु में कार्यरत मिधुन ने बताया कि अन्य बच्चों की तुलना में हर्षिता अधिक एक्टिव रही। उसके मन में किसी भी काम को लेकर अधिक जुनून हमेशा दिखा। ऐसे में उम्मीद थी कि वह कुछ बेहतर ही करेगी। मगर इतना बेहतर करेगी इसका मुझे भी पता नहीं था। 
 
बेटी ने सार्थक कर दिया जीवन 
हर्षिता के पिता योगेंद्र सिंह अरोड़ा और मां हरविंदर कौर बेटी की सफलता से गदगद हैं। उनका कहना है कि हर्षिता उनकी एकलौती बेटी है। जिसने कभी भी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। अन्य लोगों के लिए संदेश है कि यदि बेटी जीवन में आगे बढ़ना चाहती है तो उसे बेटों की तरह पूरा सपोर्ट करें। उधर, हर्षिता का कहना है कि उसने नौवीं में पढ़ाई छोड़ी उसके बाद वह बैंगलुरु और अमेरिका भी गई। इस पूरे घटनाक्रम में उसके पिता और मां हर कदम पर उसके साथ खड़े नजर आए। आज वह जो भी है उन्हीं के सपोर्ट की वजह से है।

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