हर्षिता ने बताया कि क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर एप में दस से 12 मेजर फीचर्स हैं। 32 देशों के एक हजार से ज्यादा क्रिप्टाकैरेंसी के कीमतों के उतार चढ़ाव को बताता है। जिनका इस्तेमाल लोग अपने-अपने बिजनेस के हिसाब से कर सकते हैं। मुख्य रूप से इस एप का इस्तेमाल फाइनेंस के क्षेत्र में किया जाता है। इस एप से करेंसी को चेंज कर सकते हैं। स्टॉक मार्केट के लोगों के लिए भी यह ऐप कई दिन तक लगातार पहली पसंद रहा है।
एक महीने में 1700 अमेरिकी डॉलर की इनकम
हर्षिता के एप को मात्र एक महीने में 32 देशों के हजारों लोगों ने डाउनलोड किया है। इस डाउनलोडिंग से हर्षिता को खासी कमाई भी हुई है। बकौल हर्षिता अभी तक 1700 अमेरिकी डॉलर उसके अकाउंट में आए हैं और इनकम का यह सिलसिला जारी है। हालांकि हर्षिता का मकसद मात्र रुपये कमाना नहीं है। वह एप के क्षेत्र में दुनिया को ऐसे ऐप देना चाहती है जो अन्य ऐप की तुलना में लोगों के अधिक मददगार बनें।
हर्षिता में और बच्चों से अलग जुनून दिखा
हर्षिता के कंप्यूटर टीचर मिधुन भी हर्षिता की सफलता से गदगद हैं। वर्तमान में बैंगलुरु में कार्यरत मिधुन ने बताया कि अन्य बच्चों की तुलना में हर्षिता अधिक एक्टिव रही। उसके मन में किसी भी काम को लेकर अधिक जुनून हमेशा दिखा। ऐसे में उम्मीद थी कि वह कुछ बेहतर ही करेगी। मगर इतना बेहतर करेगी इसका मुझे भी पता नहीं था।
बेटी ने सार्थक कर दिया जीवन
हर्षिता के पिता योगेंद्र सिंह अरोड़ा और मां हरविंदर कौर बेटी की सफलता से गदगद हैं। उनका कहना है कि हर्षिता उनकी एकलौती बेटी है। जिसने कभी भी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। अन्य लोगों के लिए संदेश है कि यदि बेटी जीवन में आगे बढ़ना चाहती है तो उसे बेटों की तरह पूरा सपोर्ट करें। उधर, हर्षिता का कहना है कि उसने नौवीं में पढ़ाई छोड़ी उसके बाद वह बैंगलुरु और अमेरिका भी गई। इस पूरे घटनाक्रम में उसके पिता और मां हर कदम पर उसके साथ खड़े नजर आए। आज वह जो भी है उन्हीं के सपोर्ट की वजह से है।
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