मेरठ। महानगर में टूटी सड़क, जलभराव, गृहकर, कूड़ा निस्तारण प्लांट, स्ट्रीट लाइट, ठेकेदारी, पेयजल, कान्हा उपवन गोशाला में भ्रष्टाचार की शिकायत करने की पूरी तैयारी में 18 पार्षद सदन में बैठे थे। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही निगम अफसरों पर पार्षदगण आगबबूला हो गए। इतनी हंगामेदार बैठक होगी, यह अंदेशा अफसरों को भी था। जैसे ही नगर आयुक्त अपनी कुर्सी से उठे, तभी अफसरों ने भी तुरंत सदन छोड़ने का निर्णय ले लिया।
दस महीने में नगर आयुक्त ने महानगर में कितने विकास कार्य किए हैं। क्या-क्या समस्या बनी और रोजाना किस-किस शिकायत को लेकर आम जनता पार्षदों के घर हंगामा करती है। इसका लेखाजोखा लेकर पार्षद सदन में पहुंचे थे। एक सप्ताह से पार्षद निगम अफसरों को धमका भी रहे थे कि अबकी बार सदन में सारा हिसाब लेंगे। एक साल से नए गृहकर का विवाद निगम क्यों नहीं सुलझा पाया, शहर की सड़क टूटी पड़ी, गड्ढा तक नहीं भरे।
23 जुलाई को बारिश में जलभराव का नजारा कमिश्नर और डीएम ने शहर में मुआयना कर देखा ही है। एक मई से महानगर का कूड़ा निस्तारण नहीं हो रहा है। शहर की स्ट्रीट लाइट 70 फीसदी बंद है। बोर्ड बैठक में पार्षदों का मुंह बंद करने के मकसद से निगम ने एक सप्ताह पहले पांच-पांच लाइट वितरित की हैं, जबकि पूरा शहर अंधेरे में डूबा रहता है। टेंडर प्रक्रिया से पहले ठेकेदार से सांठगांठ करना, वॉल पेंटिग के भुगतान, पेयजल की व्यवस्था चौपट, कान्हा उपवन गोशाला में भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों पर कार्रवाई करने में चुप्पी साधी हुई है।
इन सबके सुबूत के साथ सदन में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाकर 18 पार्षद गए थे। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पार्षदों का गुस्सा निगम अफसरों पर फूट गया। नगर आयुक्त सहित निगम के अधिकारी और कर्मचारी सदन छोड़कर चले गए। पार्षदों ने महापौर को लिखित में शिकायत पत्र दिए।
यह पूछे जाने थे सवाल
- 15 सितंबर को नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने मेरठ निगम की कार्यभार संभाला। एनटीपीसी के साथ अनुबंध हुए 10 माह बीत गए लेकिन निगम द्वारा कोई कार्य गांवड़ी में नहीं कराया है।
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 5 स्थान पर कूडा ट्रांसफर स्टेशन बने। नौचंदी ग्राउंड कूडा ट्रांसफर स्टेशन छोड़कर अन्य सभी स्टेशन बंद हैं।
- स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 11 स्थान पर एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुआ। मशीनरी नहीं खरीदी गई, नतीजा करोड़ों की लागत से बने एमआरएफ सेंटर चालू नहीं हुए।
- बिना टेंडर की प्रक्रिया के वॉल पेंटिग का कार्य कराया जाना बताया। 80 लाख का भुगतान बताकर उसकी फाइल चला रखी है। जबकि पुरानी वॉल पेंटिंग पर तारीख बदलने का आरोप है।
- एक मई 2025 से लोहियानगर कूड़ा निस्तारण प्लांट बंद है। निगम टेंडर की प्रक्रिया भी नहीं करा पा रहा है। कूड़ा निस्तारण करने के निगम फेल साबित हुआ।
- स्वच्छता सर्वेक्षण 17 वी रैंक से घटकर निगम 19 वी रैंक पर आ गया। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगम पर पांच करोड़ का जुर्माना भी लगाया। सुधार पर ध्यान नहीं।
- कान्हा उपवन गोशाला में गोवंशों की दुर्दशा के मामले में डॉ. हरपाल सिंह जेल में बंद हैं। अन्य अधिकारियों पर निगम ने कार्रवाई नहीं की, वहां अभी हालत ज्यादा अच्छे नहीं है।