सीबीआई जांच की हुई थी सिफारिश
यह घोटाला चार गांवों डासना, नाहल, कुशलिया और रसूलपुर सिकरोड की जमीन अधिग्रहण में किया गया था। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए वर्ष 2011-12 में 71.14 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की गई थी। 2013 में यहां अवार्ड (मुआवजा राशि) घोषित किया गया था। 2016 में क्षेत्र के 23 किसानों ने मंडलायुक्त से शिकायत की थी कि उन्हें मुआवजा नहीं मिला है।
तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने जांच कराई तो भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। यहां तत्कालीन एडीएम भू-अर्जन घनश्याम सिंह के बेटे शिवांग राठौर के नाम पर भी शासन की बिना अनुमति के जमीन खरीदी गई थी। प्रभात कुमार ने दोनों पूर्व डीएम का नाम अपनी रिपोर्ट में शामिल कर उन पर न केवल कार्रवाई की संस्तुति की थी, बल्कि इस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश भी की थी।
रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम विमल शर्मा और निधि केसरवानी को जांच में दोषी पाया था। जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि भूमि अधिग्रहण के लिए धारा-3 (डी) लागू होने के बाद भी किसानों से जमीन खरीदकर बैनामे कराए गए, जबकि जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग गई थी। जांच में आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के 9 ऐसे मामलों को पकड़ा गया है जो विमल शर्मा व निधि केसरवानी की कोर्ट में तय हुए और करीब 8 से 10 गुना से अधिक का मुआवजा दिया गया।