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लैब में जान जोखिम में...घर में रहकर भी अपनों से दूर

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मेरठ। मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हर रोज 400 से 500 टेस्ट करने वाले कोरोना योद्धा भी अपनी जिम्मेदारी बखूखी निभा रहे हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर वो मरीजों के टेस्ट कर रहे हैं। इतना ही नहीं घर में रहने के बावजूद अपनों से दूर हैं। सभी ने घर के बाहर के कमरे में अपना ठिकाना बना लिया है, जबकि कुछ तो मेडिकल में ही रहते हैं। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में अब तक 15,000 से ज्यादा टेस्ट हो चुके हैं। यहां मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, बिजनौर, सहारनपुर और हापुड़ आदि जिलों के सैंपलों की भी जांच होती है। लैब से अब तक करीब साढे़ तीन सौ लोगों में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है।
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जांच टीम में लैब प्रभारी डॉ. अमित गर्ग, डॉ. प्रियंका, डॉ. गुंजन, रजनी, मनोज और मालती आदि हैं। डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि प्रयोगशाला पारंपरिक रियल-टाइम पोलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) का उपयोग कर रही है, जो गले और नाक के पीछे से एकत्र किए गए स्वाब पर किया जाता है। कोरोना के संदिग्ध मरीजों का सबसे पहले पालीमर चेन रिएक्शन टेस्ट (पीसीआर) कराया जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है जो डीएनए के एक खंड की प्रतियां बनाता है। पॉलिमरेज उन एंजाइमों को संदर्भित करता है जो डीएनए की प्रतियां बनाते हैं। चेन रिएक्शन यानी डीएनए के टुकड़े कॉपी किए जाते हैं, एक को दो में कॉपी किया जाता है, दो को चार में कॉपी किया जाता है। पीसीआर को नमूनों को परीक्षण करने में 4.5 से 6 घंटे तक का समय लगता है। हालांकि, कुल मिलाकर सैंपल कलेक्ट करने और रिपोर्ट मिलने तक 24 घंटे के आसपास का समय लगता है। परीक्षण के लिए दो-चरण का रियल टाइम पीसीआर आयोजित करता है। पहला चरण मानव कोरोना वायरस के सामान्य आनुवंशिक तत्वों का पता लगाने के लिए बनाया गया है, जो नमूने में मौजूद हो सकते हैं। फिलहाल 15 से 16 घंटे काम करना पड़ रहा है। पहले 50 सैंपल की जांच की जा रही थी। इसके बाद संख्या बढ़ाकर 125 की गई, फिर 200 और इस तरह बढ़ते बढ़ते संख्या 500 के पार पहुंच गई है।
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