सभी ने संयुक्त सुझाव दिए कि 24 घंटे खाने के लिए अलग से पैंट्री की व्यवस्था, बाहर से आने वाले मरीजों की रिश्तेदारों के लिए रात में रुकने की व्यवस्था जब तक जाने की व्यवस्था ना हो जाए, एक घंटा प्राणायाम की व्यवस्था साथ ही चटाई भी दी जाए, मरीजों के लिए फोन की व्यवस्था, हेल्थ टीम के लिए न्यूट्रीशन का खाना, मरीज और हेल्थ टीम के लिए खाने का मेनू चेक किया जाए।
तीनो समय के खाने की व्यवस्था के अलावा 4:30 बजे अलग से चाय की व्यवस्था, मरीजों के लिए मन की शांति हेतु मोटिवेशन म्यूजिक, मरीजों के लिए अलग से 5 बेड का आईसीयू सेटअप आदि की व्यवस्था की जाए।
उच्च अधिकारियों द्वारा दिन में एक बार वीडियो कॉल से मरीजों का हालचाल जानना, हेल्थ टीम व मरीजों को एक टाइम काढ़ा की व्यवस्था, सेपरेट विंडो आने जाने के लिए, मरीजों के लिए एक बार धूप की व्यवस्था और साइकेट्रिक नर्सेज और काउंसलर फोन द्वारा परिवार अथवा मरीजो की काउसिलिंग करे ये बहुत जरूरी है।
आपको बता दे कि केजीएमयू के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्थाओं की जांच के लिए लखनऊ से मेरठ भेजे गए है।