पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों में भी जमाती खोजे गए। इनमें से कई जमातियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद चिंता बढ़ गई। पुलिस के अनुसार जमातियों और उनके संपर्क में आए लोगों की सही संख्या की जानकारी के लिए यूपी एसटीएफ ने सर्विलांस की मदद ली। इसके लिए एसटीएफ ने निजामुद्दीन मरकज के आसपास के मोबाइल टावरों का बीटीएस डाटा जांच के लिए कब्जे में लिया।
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ऐसे चली जांच
बीटीएस डाटा में तीन लाख से भी अधिक लोगों के फोन नंबर आए। बड़े स्तर से इस पर काम शुरू कर इन सभी की आईडी निकलवाई गई। उसके बाद एसटीएफ ने यूपी के सभी जनपदों को इसकी सूची भेजी। पुलिस के मुताबिक वेस्ट यूपी में करीब 38 हजार लोगों को सर्च किया जा चुका है जिनका संपर्क निजामुद्दीन तबलीगी जमात से जुड़ रहा है।
इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो तबलीगी जमात से निकले जमातियों के कहीं ना कहीं संपर्क में आए थे। जमाती होटल में, रास्ते में रुके, खाना खाया या मस्जिद में रुके या फिर अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे। ये सभी लोग कोरोना संदिग्ध माने जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सभी लोगों की जांच होना बेहद जरूरी हैं, जिससे कोरोना की चेन टूट सके।
मेरठ जोन का हाल
मेरठ जोन के 8 जनपदों की बात करें तो उनमें 14342 लोगों को सर्च किया जा रहा है। इसको लेकर एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर और गाजियाबाद जनपद में सर्विलांस टीमों और प्रत्येक जिले में गठित कोरोना सेल को भी इस मामले में लगाया है। इसकी रोजाना की रिपोर्ट शासन को जा रही है।
मेरठ जोन का आंकड़ा
| जिला |
तलाश |
मिले |
| मेरठ |
1825 |
1530 |
| बागपत |
1620 |
920 |
| सहारनपुर |
1935 |
1220 |
| मुजफ्फरनगर |
2435 |
1830 |
| हापुड़ |
1943 |
1240 |
| बुलंदशहर |
1740 |
1320 |
| गाजियाबाद |
2168 |
1530 |
| शामली |
1580 |
1220 |