अस्पताल खाली, घर पर रहने की सलाह
कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते मेटरनिटी होम्स में गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं की संख्या भी 70 फीसद घट गई है। चिकित्सक केवल प्रसव वाली माताओं को ही अस्पतालों में रख रहे हैं। अन्यथा सभी महिलाओं को घर पर ही रहकर विश्राम करने की सलाह दे रहे हैं।
20 अस्पताल वाले एक मेटरनिटी होम की बात करें तो इनमें जहां आम दिनों में 17 से 18 बेड भरे रहते थे। वहीं पिछले एक सप्ताह से केवल दो या तीन अधिकतम पांच मरीज है अन्यथा सभी मरीजों को चिकित्सकों ने घर पर ही भेज दिया है।
आम दिनों में जहां महिला को जरा सी परेशानी मे भी परिजन व चिकित्सक स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से भर्ती करा देते थे। वहीं अब जिनके प्रसव दो दिन बाद हैं उनको भी घर पर रहने की सलाह दी जा रही है। आपातकाल में ही प्रसूताओं को अस्पताल में रख रहे हैं। प्रसव बाद भी जल्द घर भेज रहे हैं।
घर है अधिक सुरक्षित, दें अच्छा माहौल
इस माहौल में महिलाओं के लिए घर ही सबसे बेहतरीन स्थान है। चाहे प्रसूता हो या गर्भवती महिला, उन्हें घर पर रखना ज्यादा अच्छा है। केवल प्रसव के लिए ही अस्पताल लेकर जाएं। घर पर रहने से संक्रमण का खतरा 98 फीसद तक कम हो जाता है। वहीं इस माहौल में महिला को अधिक प्यार, सांत्वना और अपनेपन की जरूरत है, जो माहौल उसे घर पर ही मिल सकता है। आपातकाल या अधिक आवश्यकता पर ही उन्हें अस्पताल में रहने दें।
डॉ. सपना अग्रवाल, महिला एवम स्त्री रोग विशेषज्ञ
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घबराएं नहीं ये करें गर्भवती महिलाएं
नियमित सामान्य योग, ध्यान, प्राणायाम, टहलें, धार्मिक किताबें व अच्छा साहित्य पढ़ें। रामायण देखें, भजन पूजन कर मन को सकारात्मक कार्यों में लगाएं। उत्तेजित न हों। सफाई का विशेष ख्याल रखें। संक्रमण से बचाव के लिए बाहरी व्यक्तियों से अधिक मेलजोल न रखें।
गर्भवती, प्रसूता दोनों को ही इस संक्रमण काल में घर पर रहना अच्छा है। चिकित्सक केवल प्रसव वाली माताओं को ही अस्पताल में रख रहे हैं। एक तीमारदार को ही रुकने की अनुमति है। मरीज का भोजन भी अस्पताल से ही दे रहे हैं। तीमारदार भी रोजाना बदल नहीं रहे, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके। अस्पताल बुलाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व फ़ोन पर लगातार मरीजों से संपर्क रखते है। -डॉ. सपना अग्रवाल, महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
माता के साथ पूरे परिवार के लिए यह चिंता का समय होता है, मरीज की चिंता दूर करने के लिए उनसे नियमित फ़ोन पर बात, स्तिथि जानना, दवा का फीडबैक लेते हैं। पूरी सांत्वना देते हैं ताकि अस्पताल आए बिना ही मरीज घर पर स्वस्थ रहे। -डॉ. सरिता त्यागी, महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ .
घबराएं नहीं, हिम्मत बढ़ाएं परिजन
चारों ओर कोरोना, मरीज और संक्रमण की बातें सुनकर गर्भवती महिलाओं की मानसिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। ऐसे में परिजनों का सौ फीसद साथ, स्नेह की जरूरत है। घर पर नकारात्मक नहीं, सकारात्मक माहौल दें। महिला को यकीन दिलाएं कि अस्पताल से अच्छा माहौल व सुरक्षित इस समय घर है। चिकित्सक से नियमित बात करें। योग, ध्यान अवश्य करें। -डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक