देश के अधिकतर डॉक्टर व नर्स कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज मेरठ में स्टाफ नर्स वर्षा इन दिनों अपनी चार माह की बेटी से मिल नहीं पा रही हैं। सात दिन कोरोना वार्ड में ड्यूटी के बाद अब उन्हें 14 दिनों तक एकांतवास में रहना होगा।
वर्षा ने बताया कि उनके सास-ससुर ही बच्ची और परिवार की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका मायका फलावदा व ससुराल शास्त्रीनगर में है। वर्षा कहती हैं कि इस संकट के समय में पति और परिवार वाले उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।
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वहीं जब उनसे पूछा गया कि कोरोना वार्ड में किस तरह से ड्यूटी की जिम्मेदारी निभाई तो उन्होंने बताया कि मरीजों को दवाइयां देना और उनके इलाज की जिम्मेदारी हमारी प्राथमिकता है। सावधानी बरतनी पड़ती है।
वर्षा बताती हैं कि परिवार से फोन पर ही बात होती है। ड्यूटी ऑफ होने के बाद भी कहीं जा नहीं सकते थे। वहीं रहना पड़ता था। परिवार वाले सावधानी की सलाह देते रहते हैं। अब 21 दिन बाद ही परिजनों से मिल पाऊंगी। सबसे ज्यादा छोटी बेटी की याद आती है। लेकिन खुशी इस बात की है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली हुई है।
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