घर जाना नहीं होता, वीडियो कॉलिंग कर बेटे, बेटी और पत्नी का हालचाल पूछ लेता हूं। थोड़ी सी परेशानी है, मगर जिम्मेदारी इससे कहीं बड़ी है। यह शब्द हैं मेरठ में डॉ. अभिषेक सिंह के। तीन अप्रैल से जो टीम कोरोना मरीजों का इलाज कर रही है, डॉ. अभिषेक उसके प्रभारी हैं। हर रोज जान जोखिम में डालकर कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों की टीम को सलाम। इनका भी परिवार है, परेशानियां हैं। इसके बाद भी यह लोग लगातार कोरोना से लड़ रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. अभिषेक सिंह।
उनकी पत्नी डॉ. नेहा मेडिकल में ही पैथोलॉजिस्ट हैं। बेटी अनन्या छठी क्लास में पढ़ती है और बेटा अथर्व साढ़े तीन साल का है। उन्होंने बताया कि अब वीडियो कॉलिंग के जरिए ही परिवार को देख पाता हूं। फोन पर बातचीत कर उनका दिनभर का कार्यकलाप जान लेता हूं। जब ड्यूटी खत्म हो जाती है तो उनसे बात करता हूं। माता-पिता बनारस में रहते हैं। पहले उनसे रोज बात होती थी। तीन अप्रैल को ड्यूटी लगने के बाद से दूसरे तीसरे दिन ही बात कर पाता हूं। डॉ. अभिषेक कहते हैं, माता-पिता से बात करके हौसला मिलता है। वह मरीजों को भी मोटिवेट करते हैं। उनको बीमारी और उससे बचने के उपाय बताते रहते हैं।
अभी नौ अप्रैल तक ड्यूटी है। इसके बाद कोरोना का टेस्ट होगा। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद 14 दिन क्वारंटीन में जाना पड़ेगा। इसके बाद ही परिवार के पास जा पाऊंगा। उन्होंने कहा कि परेशानी तो होती है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। उसके लिए प्रयत्नशील हूं। अभी कोरोना वार्ड में 22 लोगों का इलाज चल रहा है। 10 लोग कोरोना संदिग्ध हैं। वह अलग आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। कुल 32 लोगों की जिम्मेदारी है।
बच्चे पूछते हैं पापा कब आओगे घर
डॉ. अभिषेक ने बताया कि बच्चे पूछते हैं कि पापा घर कब आओगे। उन्हें समझाना पड़ता है, बताना पड़ता है कि इस बार ड्यूटी थोड़ी लंबी है। अस्पताल में ही रहना पड़ेगा। इसके बाद वे जल्द ही आकर मिलेंगे।
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