मोबाइल नंबर ही गलत निकले
सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में से नंबर निकालकर जब व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़ा गया तो कई बच्चों के अभिभावकों के नंबर ही गलत निकले। उन्होंने सिम बदले हुए थे। कई अभिभावकों के पास इंटरनेट चलाने के लिए डाटा ही नहीं है।
शिक्षक भी नहीं समझ पा रहे
50 की उम्र से अधिक के शिक्षक तो स्वयं ही स्मार्ट फोन का उपयोग ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। ई-एजुकेशन की उन्हें समझ नहीं है। सभी सामग्री को एक से दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड कर इतिश्री कर रहे हैं, उसका लाभ बच्चे को मिल रहा है या नहीं इसका फॉलोअप नहीं किया जा रहा।
चार हिस्सों में बंटेगा सिलेबस
डीआईओएस ने बताया कि अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग की, जिसमें बताया कि कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यालयों के लिए कोर्स को चार हिस्सों में बांटा जाएगा। एक हिस्सा जो स्वयंप्रभा और दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाया जाएगा, दूसरा बच्चे स्वयं पढ़ेंगे। तीसरा बच्चे प्रोजेक्ट के माध्यम और चौथा हिस्सा ऐसा होगा जिसे ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है।
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