फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना काल में बड़ी चुनौती: स्मार्टफोन नहीं है पास... बच्चे कैसे करेंगे ऑनलाइन क्लास, 15 जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई

Mon, 13 Jul 2020 05:09 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
स्मार्टफोन सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक आने लगे हैं। बैठक हो रही है और ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी है। लेकिन जिले के 404 विद्यालयों के करीब 80 हजार छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन पढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है। विद्यालयों में इसी पर मंथन चल रहा है कि 15 जुलाई तक कैसे ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई जाए। 10वीं और 12वीं क्लास को छोड़कर मेरठ में माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में करीब एक लाख 60 हजार विद्यार्थी हैं।

विज्ञापन


कक्षा 10 व 12 को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा लिए ही इस बार अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया है। जिले में शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। इन ग्रुपों में अभिभावकों और विद्यार्थियों को जोड़ा जा रहा है। वहीं 50 प्रतिशत अभिभावक तो स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण ग्रुप से नहीं जुड़ सके हैं। ऐसे में शिक्षकों ने उनके किसी रिश्तेदार या परिचितों के नंबर लेकर ग्रुप में जोड़कर अपनी खानापूर्ति तो कर दी। लेकिन इसका लाभ विद्यार्थी तक कैसे पहुंचेगा यह सवाल है। ऐसे भी विद्यार्थी है जिनको व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ तो लिया गया है, लेकिन उनके पास हमेशा फोन नहीं रहता है। अप्रैल से कवायद चल रही है, लेकिन अभी तक व्यवस्था पूरी नहीं सकी।

इसके अलावा जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं उनके पास ई-एजुकेशन की समझ नहीं है। बहुत विद्यार्थियों को तो मोबाइल से कैसे पढ़ना है, यह समझ ही नहीं आ रहा है। माता-पिता भी मात्र साक्षर होने के कारण उनकी मदद करने में असहाय रहते हैं। कई गांवों में इंटरनेट कनेक्टिीविटी की समस्या भी रहती है। जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशानुसार व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। ग्रामीण इलाका होने के कारण परेशानी आ रही है।
विज्ञापन


शिक्षकों की उपस्थिति पूरी
सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य बालकृष्ण का कहना है कि सभी शिक्षक विद्यालय में उपस्थित हो रहे हैं। एडमिशन भी शुरू हो गए हैं। लेकिन अधिकांश स्टूडेंट के पास मोबाइल नहीं हैं, जिस कारण सभी बच्चे कैसे ऑनलाइन पढ़ेंगे, यह समस्या तो है। लेकिन जिन बच्चों के पास फोन नहीं है वह स्वयंप्रभा चैनल के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं। केके इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. वीर बहादुर सिंह ने बताया कि शिक्षक एडमिशन प्रक्रिया में लग गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: ये तीन मोस्ट वांटेड हैं पुलिस कस्टडी से फरार, ढाई लाख तक का है इनाम, तलाश में जुटे अफसर

विज्ञापन

मोबाइल नंबर ही गलत निकले
सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में से नंबर निकालकर जब व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़ा गया तो कई बच्चों के अभिभावकों के नंबर ही गलत निकले। उन्होंने सिम बदले हुए थे। कई अभिभावकों के पास इंटरनेट चलाने के लिए डाटा ही नहीं है। 

शिक्षक भी नहीं समझ पा रहे
50 की उम्र से अधिक के शिक्षक तो स्वयं ही स्मार्ट फोन का उपयोग ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। ई-एजुकेशन की उन्हें समझ नहीं है। सभी सामग्री को एक से दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड कर इतिश्री कर रहे हैं, उसका लाभ बच्चे को मिल रहा है या नहीं इसका फॉलोअप नहीं किया जा रहा। 

चार हिस्सों में बंटेगा सिलेबस
डीआईओएस ने बताया कि अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग की, जिसमें बताया कि कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यालयों के लिए कोर्स को चार हिस्सों में बांटा जाएगा। एक हिस्सा जो स्वयंप्रभा और दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाया जाएगा, दूसरा बच्चे स्वयं पढ़ेंगे। तीसरा बच्चे प्रोजेक्ट के माध्यम और चौथा हिस्सा ऐसा होगा जिसे ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें