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बेबसी: उफ... शव ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मिला, आखिर कहां है बेड, कोई बताने वाला नहीं

Fri, 30 Apr 2021 02:53 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में अस्पतालों से लेकर श्मशान तक हालात रोज बिगड़ते जा रहे हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं हैं। इलाज के लिए ऑक्सीजन कभी भी कम पड़ जाती है।
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मेडिकल अस्पताल में व्हीलचेयर पर पड़ा महिला का शव और विलाप करता युवक। फोटो : सुनील कैथवास - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ में अस्पतालों से लेकर श्मशान तक हालात रोज बिगड़ते जा रहे हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं हैं। इलाज के लिए ऑक्सीजन कभी भी कम पड़ जाती है। अपनों को बचाने के लिए परिजन चीखने-चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे। अस्पतालों में ऐसे हालात हैं कि देखकर लगता है कि पता नहीं किस जगह आ गए हैं। यहां शवों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक कम पड़ रहे हैं। कोई अपने के शव को व्हीलचेयर में तो कोई गोद में उठाकर ले जा रहा है।

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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर गुरुवार को हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला। इस दृश्य को जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई। इमरजेंसी में एक महिला की मौत के बाद शव को एंबुलेंस तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। परिजन शव को व्हीलचेयर में लेकर एंबुलेंस तक पहुंचे। हालांकि जब शव एंबुलेंस पर पहुंच गया तब स्वास्थ्य कर्मी स्ट्रेचर लेकर पहुंचा। दो दिन पहले इसी जगह पर एंबुलेंस नहीं मिलने पर परिजनों को शव गाड़ी में किसी तरह जगह बनाकर ले जाना पड़ा था। मेडिकल अस्पताल में रोज किसी न किसी को ऐसी ही पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेड की पर्याप्त सुविधा होने के दावे कर रहे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को बीमार मां को भर्ती कराने के लिए बेटा इमरजेंसी पहुंचा, लेकिन उसे लौटा दिया गया। मेडिकल कॉलेज की छोड़िए शहर के निजी अस्पतालों में गंभीर मरीज के बारे में सुनते ही बेड के लिए मना किया जा रहा है। बुधवार को पांच घंटे तक रिटायर पीसीएस अधिकारी पत्नी को लेकर भटकते रहे। ऐसे में सवाल ये है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किस तरह से मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कहां पर बेड खाली हैं। अगर खाली हैं तो मरीजों को लौटाया क्यों जा रहा है। अगर खाली नहीं हैं तो संख्या बढ़ाने की बजाय घटाई क्यों जा रही है। इन सब सवालों पर गोलमोल बात के अलावा स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं है।
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