कोरोना संक्रमित मरीजों की स्वाइन फ्लू और मलेरिया की दवा ने की मदद
मेरठ। कोरोना वायरस की अभी कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनी है, फिर भी मरीज ठीक कैसे हो गए। इस सवाल का जवाब कोविड-19 अस्पताल के प्रभारी डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने दिया।
उन्होंने बताया कि कोरोना के मरीजों को मलेरिया में दी जाने वाली क्लोरोक्विन, एंटी रेट्रोवायरल ड्रग, स्वाइन फ्लू में दी जाने वाली टेमीफ्लू व गले की दवा एजिथ्रोमाइसिन का कॉम्बीनेशन दिया जाता था। दवाओं का असर, मरीज की हिम्मत व डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई। इन सभी के 24 घंटे के अंदर दो-दो टेस्ट किए गए। दोनों ही बार वह नेगेटिव आए। तब डॉक्टरों ने कहा कि ये लोग कोरोना मुक्त हो गए। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी बरतें और इससे बचने के निर्देशों का पालन करें। थोड़े-थोड़े अंतराल पर हाथ धुलते रहें तो इससे आसानी से निपटा जा सकता है। लोग सतर्क रहें। जागरूक बनें। डर और तनाव को खुद पर हावी न होने दें। जांच कराएं। उन्होंने बताया कि दरअसल लोगों को पहले सर्दी-खांसी शुरू होती है, फिर बुखार के बाद गला जाम हो जाता है। सामान्य बीमारी समझकर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाते रहते हैं। लेकिन इत्मीनान रखें, कोरोना को लोग मात दे सकते हैं।