मेरठ। सीसीएसयू में कोरोना ने वर्ष 2021-22 का बजट बिगाड़ दिया है। इस साल विवि को 21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कम रजिस्ट्रेशन होने और प्राइवेट परीक्षा फार्म देेेरी से भरा जाना भी इसकी वजह है। विवि अब खर्चों में कटौती करेगा।
सीसीएसयू में सोमवार को कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में वित्त समिति की बैठक हुई। बैठक में वर्ष 2021-22 का अनुमानित बजट प्रस्तुत किया गया। पूरे साल में 137 करोड़ 12 लाख 25 हजार रुपये व्यय का बजट प्रस्तुत किया गया। आय की बात करें तो यह घटकर 116 करोड़ चार लाख 98 हजार रुपये रह गई है। वर्ष 2020-21 के बजट की तुलना करें तो व्यय जहां 145 करोड़ 55 लाख 60 हजार रुपये था, वहीं आय 137 करोड़ 12 लाख 25 हजार रुपये थी। इस साल 21 करोड़ रुपये विवि घाटे में है। हालांकि कोरोना के कारण प्राइवेट परीक्षा इस बार अब भरे जाने शुरू हुए हैं। परीक्षा फार्म भी अभी भरे जाने शुरू हुए हैं। इनसे विवि को 40 करोड़ से अधिक की आमदनी हुई है। ऐसे में यह आय अगले बजट में जुड़ जाएगी। इसके अलावा कोरोना के कारण इस साल रजिस्ट्रेशन भी 20 फीसदी कम हुए, उसका भी असर पड़ा है। बैठक में कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, वित्त नियंत्रक डॉ. सुशील कुमार गुप्ता, रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा मौजूद रहे।
एक करोड़ से बदलेगी लैब की सूरत
सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। यहां पर कई साल से चली आ रही कंप्यूटर की समस्या अब खत्म होगी। वित्त समिति की बैठक में तय हुआ कि संस्थान की कंप्यूटर लैब में एक करोड़ रुपये के कंप्यूटर लगाकर उसे हाईटेक बनाया जाएगा। 230 नए कंप्यूटर खरीदे जाएंगे एवं 34 को अपग्रेड कराया जाएगा।
बैठक में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का पारिश्रमिक बढ़ाए जाने पर मुहर लगी। पहले जिनका पारिश्रमिक 15 हजार रुपये था, उनका बढ़ाकर अब 18 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा जिनका पारिश्रमिक 18 हजार रुपये था, उसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया है। स्थाई कर्मचारियों का मेडिकल भत्ता साढ़े सात सौ से बढ़ाकर साढ़े आठ सौ किया गया है। कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए अब साढ़े सात सौ रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। कैंपस में सेमिनार और शोध को बढ़ावा देने पर मुहर लगी है। नई शिक्षा नीति के तहत विवि में कई नए भवन बनने हैं, ऐसे में पुराने भवन के निर्माण तेजी से कराने को कहा गया है।
जहां एडमिशन ज्यादा, वहां बढ़ेगी सैलरी
कैंपस में सेल्फ फाइनेंस विभागों में एडमिशन और क्वालिटी का भी आकलन किया जाएगा। जिन विभागों में सबसे अधिक एडमिशन होंगे और पढ़ाई का माहौल भी बेहतर होगा, वहां के स्टाफ को सामान्य मानकों से अधिक सैलरी दी जा सकेगी। अभी तक सेल्फ फाइनेंस विभागों की बात करें तो कैंपस का विधि अध्ययन संस्थान और कॉमर्स विभाग सबसे बेहतर स्थिति में है। जहां सबसे कम एडमिशन होंगे, वहां पर वेतन नहीं बढ़ाया जाएगा।