नहीं दिया छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र : आरआई
पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक विद्यानिवास मिश्रा के मुताबिक सिपाही अंकुर राणा तीन जून को दस दिन की छुट्टी पर गया था। इसके बाद उसने छुट्टी के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया।
उधर पुलिस अफसरों के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस तक पुलिस की छुटिट्यों पर रोक लगी थी। गांव वालों के मुताबिक अंकुर राणा की पत्नी के ऑप्रेशन में लाखों रुपये खर्च हुए थे। इस बात से भी वह टेंशन में था। चर्चा है कि छुट्टी पर नहीं जाने के कारण अंकुर तनाव में था।
मोबाइल पर बात करने के बाद उठाया कदम
सिपाही अंकुर राणा बेहद खुश मिजाज था। कभी उसके चेहरे पर साथियों ने तनाव नहीं देखा। ड्यूटी के दौरान भी उसने कभी किसी का इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि वह जीना नहीं चाहता है। अपने दिल की बात कभी किसी से नहीं कही।
सिपाही अंकुर राणा पीलीभीत से तबादले पर 2017 में बिजनौर आया था। वह नहटौर थाने के साथ पुलिस लाइन में तैनात रहा। 19 जुलाई को उसकी ड्यूटी कलक्ट्रेट में ईवीएम की सुरक्षा में लगी थी।
अंकुर राणा के साथ पुलिस लाइन से गारद में सिपाही सुशील अनुज व दीपक की ड्यूटी भी लगती थी। उनकी ड्यूटी बदलती रहती है। 24 घंटे गारद ईवीएम पर तैनात रहती है। हर दो घंटे में उनकी ड्यूटी की अदला बदली होती है।
अंकुर बेहद खुशमिजाज था। अंकुर किसी से अपने मन की बात नही बताता था। उसकी शादी पांच मार्च को बागपत जिले के गांव बसी निवासी कोमल के साथ हुई थी। कोमल बीमार रहती थी। इस बात से अंकुर परेशान था। कोमल अपने मायके गई हुई है।
पुलिस के मुताबिक खुदकुशी करने से पहले अंकुर ने मोबाइल पर अपनी पत्नी से बात की थी। इसके बाद उसने सरकारी राइफल से खुद को गोली मार ली। सिपाही अकुंर राणा का बड़ा भाई पंकज एसएसबी में तैनात है।
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ड्यूटी की अनिवार्यता और आवेदक की जरूरत का हो आकलन: गर्ग
1999 बैच के सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विजय गर्ग ने कहा कि जहां तक पुलिस कर्मियों के अवकाश की बात है, परिस्थितिगत अवकाश की स्वीकार्यता एक संतुलन के आधार पर होनी चाहिए। इसमें ड्यूटी की अनिवार्यता और आवेदक की ग्रेविटी ऑफ द सिच्युएशन भी देखनी चाहिए। दोनों के बीच सामंजस्य बनाकर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।