रखवाले ही उड़ा रहे कानून की धज्जियां, 24 घंटे बाद भी नहीं लिखी गई रिपोर्ट
शहर में कानून के रखवाले ही कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्होंने मान लिया है कि उनके लिए सारे गुनाह माफ हैं। नए साल पर दोस्त के साथ तमंचा लेकर डिस्को कर रहे सिपाही को गोली लगने के मामले में 24 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज की गई है।
गुरुवार देर रात हाईवे स्थित होटल में न्यू ईयर पार्टी के दौरान सिपाही को गोली लगी। इस घटना को लेकर क्राइम ब्रांच टीम से लेकर अधिकारी तक मौन हैं। शुक्रवार को मामले की पोल खुली। पता चला कि होटल में दोस्त ने अवैध असलहे से सिपाही को गोली मारी। सिपाही के दोस्त आयुष विश्वकर्मा के भाई को पुलिस ने पकड़ा है। उसके पास असलहा कहां से आया और किसकी अनुमति से वह होटल में गोलियां चला रहा था।
अभी पुलिस ने इस बात का पता लगाना मुनासिब नहीं समझा है। पुलिस की मंशा है कि मामला बिना कार्रवाई के दब जाए। सवाल उठता है कि अगर गोली पैर की जगह सिपाही के सीने में लग जाती तो कौन जिम्मेदार होता। क्राइम ब्रांच प्रभारी वरुण शर्मा ने कोई जानकारी संबंधित थाना पुलिस को नहीं दी। इंस्पेक्टर जानी ऋषि पाल सिंह का कहना है कि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है।
थाने में आरोपी की चल रही मेहमाननवाजी
सिपाही को गोली मारने वाले आरोपी के भाई को एक थाने में रखा गया है। वहां उसकी मेहमाननवाजी चल रही है। सवाल है कि पुलिस ने आरोपी के भाई को पकड़ लिया है तो रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी क्यों की जा रही है। शुक्रवार को भी पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई के नाम पर चुप्पी नहीं तोड़ी।