- फेडरेशन ने इस मामले में सीसीएसयू से की स्पष्ट नीति जारी करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबंधित स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षाओं के दौरान नियुक्त परीक्षकों के यात्रा भत्ता (टीए) और दैनिक भत्ता (डीए) के भुगतान को लेकर विवाद हो गया है। सेल्फ फाइनेंस कॉलेज फेडरेशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर भुगतान की स्थिति पर लिखित रूप से स्पष्ट नीति जारी करने की मांग की है।
फेडरेशन का आरोप है कि विश्वविद्यालय की ओर से कोई लिखित नीति न होने के कारण महाविद्यालयों पर अनावश्यक आर्थिक और प्रशासनिक दबाव पड़ रहा है, जिससे परीक्षाओं का संचालन बाधित हो रहा है। फेडरेशन के अध्यक्ष एडवोकेट नितिन यादव के अनुसार एक पत्र के जवाब में 10 नवंबर 2025 को विश्वविद्यालय ने आश्वासन दिया था कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के भुगतान की व्यवस्था विवि स्तर पर की जाएगी, लेकिन स्थिति वैसी ही है। परीक्षक महाविद्यालयों पर टीए और डीए के भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं। कई मामलों में महाविद्यालय असमर्थता जताते हैं तो परीक्षक न तो परीक्षा देने आते हैं और न ही औपचारिक रूप से असहमति जताते हैं। इससे परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की नई परीक्षक नियुक्ति नीति के तहत एक बार स्वीकृत परीक्षक को बदला नहीं जा सकता। स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय से कोई वित्तीय सहायता या बजटीय मद नहीं मिलता और उनके पास भी ऐसा कोई अधिकृत मद नहीं है, जिससे परीक्षकों का टीए और डीए दिया जा सके। फेडरेशन ने परीक्षा नियंत्रक और वित्त अधिकारी को संबोधित पत्र में मांग की है कि इस मामले में स्पष्ट लिखित नीति जारी की जाए, जिसमें तय हो कि टीए और डीए का भुगतान विश्वविद्यालय करेगा या कोई अन्य व्यवस्था होगी। साथ ही, परीक्षकों द्वारा महाविद्यालयों पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएं। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि नीति के अभाव में स्थिति बिगड़ती रही तो मामला उच्च प्रशासनिक और वैधानिक मंचों पर उठाना पड़ेगा।