मोदीपुरम। मोदी कॉलोनी में पेयजल के विवाद पर शनिवार को मोदी प्रबंधन ने दो दिन पहले जिलाधिकारी को दिए विधायक के पत्र का जवाब दिया। मोदी रबर प्रबंधन ने कहा कि भूमि स्थानांतरण को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं थी। विधायक को गलत साक्ष्य पेश कर भ्रमित किया गया है।
मोदी प्रबंधन ने कहा कि कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने बीती 19 अगस्त को जिला अधिकारी को पत्र लिखकर मोदी रबर प्रबंधन पर लीज पर ली गई भूमि को गलत तरीके से हस्तांतरित करने का आरोप लगाया। विज्ञप्ति में बताया कि मोदी रबर लिमिटेड द्वारा वर्ष 1972 में ग्राम पल्हैड़ा स्थित निजी स्वामित्व की भूमि एवं राज्य सरकार से निर्धारित कीमत अदा कर लीज पर प्राप्त की थी। उस पर टायर फैक्टरी का निर्माण किया था। इसमें तीन हजार स्थानीय लोगों समेत अन्य व्यक्तियों को रोजगार दिया था। वर्ष 2001 में श्रमिकों की अवैध हड़ताल के कारण फैक्टरी बंद रही। जिस पर औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड द्वारा फैक्टरी को बीमार औद्योगिक कंपनी अधिनियम अंतर्गत बीआईएफआर के तहत बंद किए जाने के साथ स्थानांतरण की स्वीकृति दी थी।
प्रबंधन ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भूमि एवं शेयर ट्रांसफर करने पर आपत्ति नहीं की गई थी। शासन की अनुमति के बाद टायर फैक्टरी को वर्ष 2009 में कांटिनेंटल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से बदल दिया था। मोदी रबर ने तत्कालीन जिला अधिकारी/उप जिलाधिकारी सरधना की स्वीकृति के उपरांत निजी स्वामित्व एवं प्रदेश सरकार से लीज पर प्राप्त भूमि का नियमानुसार स्थानांतरण किया। पूर्व कर्मचारियों द्वारा मोदी रबर की निजी भूमि पर निर्मित कॉलोनी में अवैध रूप से रहने पर उच्च न्यायालय में वर्ष 2011 में याचिका दायर की गई थी। जिस पर उच्च न्यायालय ने जिला अधिकारी को मकानों के स्वामित्व के लिए श्रमिकों द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदन को निस्तारित करने का निर्देश दिया था। जिलाधिकारी ने आदेश 07 जून 2014 की जांचकर श्रमिकों का प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया। इसके बाद श्रमिकों द्वारा पुन: उच्च न्यायालय डिवीजन बैंच के समकक्ष याचिका दायर की गई थी। जिसमें उच्च न्यायालय में अपने आदेश 16 जुलाई 2014 अंतर्गत निर्देश जारी किया कि याचिकाकर्ताओं को उक्त मकानों के स्थानांतरण का अधिकार नहीं है। मोदी रबर के श्रमिकों को वर्ष 2009 में भुगतान कर मुक्त किया जा चुका था।
कांटिनेंटल इंडिया द्वारा कॉलोनी को दस वर्ष के किराए पर लेकर कार्यरत कर्मचारियों को दिया था। कांटिनेंटल इंडिया लिमिटेड में 800 में से 100 कर्मचारी मोदी कॉलोनी में थे। किरायानामा 15 जुलाई 2020 को समाप्त हो गया। इसी परिप्रेक्ष्य में मोदी रबर द्वारा आवासीय कॉलोनी को खाली कराया जा रहा है। असामाजिक तत्व कॉलोनी पर अवैध कब्जा करने के उद्देश्य से कैंट विधायक को गलत तथ्यों की जानकारी देकर भ्रमित कर रहे है।