यहां पांचवी-छठी शताब्दी गुप्तकाल के अवशेष भी सामने आए हैं। 9 वीं-10वी शताब्दी यानि राजपूत काल और मुगल काल के अवशेष भी मिले हैं। यहां मिले साक्ष्यों के आधार पर इन सांस्कृतिक कालों में रहने वालों का रहन-सहन कैसा था, इस पर विस्तृत अध्ययन होना बाकी है, क्योंकि अभी उत्खनन की प्रक्रिया जारी है। इस दौरान कुछ नए साक्ष्य भी मिल सकते हैं।
विविध कालक्रम में यहां के निवासियों का रहन-सहन ज्यामितीय पैटर्न पर था। पीजीडब्ल्यू के निर्माण के लिए चाक का इस्तेमाल किया गया होगा। इनको पकाने के लिए बनाए गए पिट भी मिले हैं। लकड़ी जलाने से चारकोल के अवशेष भी मिले हैं। पशुओं की हड्डियां इस बात का संकेत हैं कि यहां के लोग पशुपालन भी करते रहे होंगे।
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