सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अनुसार परिजन और पुलिस गढ़ रोड स्थित एक अस्पताल में घायल जैद को लेकर पहुंची थी, जहां अस्पताल के बाहर ही उसे मृत बता दिया गया था। इस पर परिजनों में कोहराम मच गया। लेकिन उसकी सांसें चल रही थीं। जिसके बाद घायल जैद को हापुड़ रोड स्थित एक अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां भी युवक को भर्ती नहीं किया। इसके बाद एक अन्य अस्पताल में युवक को भर्ती कराने का प्रयास किया गया। लेकिन वहां भी हाथ खड़े कर दिए गए।
सवाल है कि इमरजेंसी सेवाओं के लिए शहर के दस अस्पतालों को रविवार को ही तय किया गया था। लेकिन उसके बावजूद भी घायल जैद को भर्ती करने से क्यों इंकार कर दिया गया। सीओ कोतवाली का कहना है कि वे खुद घायल को लेकर अस्पताल गए थे। लेकिन युवक के सिर में गोली लगे होने और हालत गंभीर होने के बावजूद भी किसी भी डॉक्टर ने इलाज नहीं किया।
शातिर अपराधी ने चलाई गोली
लॉकडाउन में ताबड़तोड़ फायरिंग से लिसाड़ी गेट का लक्खीपुरा इलाका दहल गया। पुलिस के अनुसार विवाद बच्चों के बीच होना बताया गया। लेकिन उसके बाद बड़े आमने-सामने आ गए थे। वहीं, लोगों का कहना है कि करीब 20 से 25 राउंड फायरिंग हुई। चर्चा है कि एक शातिर अपराधी और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की।
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