मेरठ। नेशनल हाईवे-58 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा पाने के लिए सकौती और दशरथपुर क्षेत्र के व्यापारी पिछले 15 वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पीड़ितों का आरोप है कि हर बार अधिकारी बदलने पर उनसे नए दस्तावेजों की मांग की जाती है, लेकिन तीन-तीन बार कागजात जमा करने के बावजूद उन्हें अब तक एक रुपये का भी भुगतान नहीं मिला है।
परतापुर से सकौती तक एनएच-58 के चौड़ीकरण का काम वर्ष 2007 से 2014 के बीच किया गया था। इस दौरान सकौती और दशरथपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण हुआ था। सुपरटेक निवासी विक्रांत गोयल, सूर्या पैलेस (दिल्ली रोड) निवासी संजय खुराना और गुप्ता कॉलोनी निवासी दिनेश मेहंदीरत्ता ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 में सकौती और दशरथपुर में जमीन खरीदी थी जिसके तुरंत बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई। सकौती में उनके लगभग 17 हजार वर्गगज और 5 हजार वर्गगज के भूखंडों तथा दशरथपुर में करीब 8 हजार वर्गगज भूमि के कुछ हिस्सों को हाईवे के लिए लिया गया था।
अधिकारियों के बदलते ही मांगे जाते हैं नए दस्तावेज
पीड़ित संजय खुराना ने बताया कि वे वर्षों से एडीएम (भूमि अध्याप्ति) कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हर बार अधिकारी का ट्रांसफर होने पर फाइल ठंडे बस्ते में चली जाती है। दिनेश मेहंदीरत्ता ने आरोप लगाया कि पहले उन्हें पटवारी से भूमि की शिनाख्त (पहचान) कराने को कहा गया। उसके बाद नया बैंक खाता खुलवाने और अन्य कागजात मांगे गए। पीड़ितों का कहना है कि जब भी वे मुआवजे की मांग करते हैं विभाग कोई नया नियम या दस्तावेज सामने रख देता है और अब तो अधिकारी मुआवजा देने से ही साफ इन्कार कर रहे हैं।
जिम्मेदार का बयान (वर्जन):
सकौती और दशरथपुर के भू-स्वामियों की जो भी समस्याएं हैं उनका उचित समाधान किया जाएगा। संबंधित पीड़ित पक्ष अभी तक मुझसे व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला है। वे किसी भी कार्यदिवस में कार्यालय आकर अपनी बात रख सकते हैं, मामले की जांच कर न्याय किया जाएगा।— नवीन चंद्र, एडीएम, लैंड और एक्विजिशंस