मखदूमपुर घाट पर मेले के आयोजन पर संकट के बादल
हस्तिनापुर। प्रतिवर्ष की भांति मखदूमपुर गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले पांच दिवसीय मेले के आयोजन पर पानी फिरता नजर आ रहा है। गत दिनों गंगा में जलस्तर बढ़ने से घाट के आसपास के क्षेत्र में पानी भर गया था। इस कारण मेला स्थल दुरुस्त नहीं है और न ही ऐसे हालात में यहां मेले के आयोजन को लेकर की जाने वाली तैयारी दिखाई दे रही है।
मखदुमपुर गंगा घाट पर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रति वर्ष जिला पंचायत द्वारा गंगा स्नान मेले का आयोजन कराया जाता है। परंतु इस वर्ष बेमौसम बारिश के कारण गंगा में आई बाढ़ ने इस मेले के आयोजन पर ग्रहण लगा दिया है। मोटा बजट खर्च कर मखदूमपुर गंगा घाट पर गंगा की रेती में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पांच दिवसीय मेले का आयोजन होता है। पिछले दो सालों में कोरोना संक्रमण के कारण मेले का आयोजन स्थगित रहा। इस वर्ष लोगों को उम्मीद जगी थी कि गंगा की रेती में तंबू नगरी बसेगी और मेले का आयोजन होगा।
परंतु मंगलवार को अचानक उफान पर आई गंगा ने मेले के आयोजन पर भी पानी फेर दिया। गंगा में इस समय पानी अधिक है और मेला स्थल पर तैयारी महीनों पहले से शुरू कर दी जाती है। मेले के लिए जमीन चिह्नित करने के साथ ही जिला पंचायत द्वारा रास्ते बनाने और अन्य कार्य शुरू हो जाते थे। परंतु इस बार मेला स्थल पर अधिक पानी होने के कारण मेले के आयोजन की संभावना अभी तक नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि मेला स्थल के आसपास पानी भरा है। गंगा में आई बाढ़ के कारण पूरा क्षेत्र प्रभावित है। पानी सूखने में भी अभी 15 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में मेले की तैयारी हो पानी मुश्किल लग रहा है। वहीं, मेले का आयोजन न होने से दुकानदारों की उम्मीदों पर भी पानी फिर सकता है। मेले में काफी संख्या में दुकानदार अपनी दुकानें सजाकर सामान की बिक्री करते थे।
अभी दिशा-निर्देश नहीं मिले
छोटे स्तर पर मेले की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अभी शासन-प्रशासन की तरफ से मेले के आयोजन को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
- गौरव चौधरी, अध्यक्ष, जिला पंचायत